आजकल पेट की अम्लता यानी एसिडिटी की शिकायत काफी आम हो गई है। हल्का जलन से लेकर गंभीर जलन तक, यह समस्या लगभग हर उम्र में देखने को मिलती है। लेकिन हाल ही में कुछ विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि लंबे समय तक अम्लता की समस्या बनी रहने पर कैंसर का खतरा भी हो सकता है। सवाल यह उठता है कि क्या यह दावा सच है या सिर्फ अफवाह?
क्या है अम्लता और कैसे होती है?
अम्लता में पेट में बनने वाला एसिड (हाइड्रोक्लोरिक एसिड) सामान्य से ज्यादा होता है, जिससे खाने के बाद या खाली पेट जलन महसूस होती है। यह समस्या अनियमित खानपान, तनाव, अधिक तला-भुना और मसालेदार भोजन खाने से बढ़ जाती है।
अम्लता और कैंसर के बीच क्या है कनेक्शन?
हालांकि सभी अम्लता वाले मरीजों को कैंसर नहीं होता, लेकिन लंबे समय तक एसिडिटी का लगातार रहना गैस्ट्रिक कैंसर (पेट का कैंसर) या इसोफेगल कैंसर (अन्ननली का कैंसर) का जोखिम बढ़ा सकता है। यह खासतौर पर तब होता है जब अम्लता के साथ गैस्ट्राइटिस (पेट की दीवार की सूजन) या एसोफेगस बैरेट्स जैसी बीमारियां जुड़ी हों।
गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट बताते हैं, “अगर मरीज पेट की अम्लता को समय पर कंट्रोल नहीं करता, तो लंबे समय में पेट की परतों को नुकसान पहुंचता है। यह चोट कैंसर का कारण बन सकती है। इसलिए एसिडिटी को नजरअंदाज करना ठीक नहीं।”
कब हो जाएं सावधान?
लगातार पेट में जलन या दर्द हो।
निगलने में तकलीफ हो।
वजन अचानक कम होने लगे।
बार-बार उल्टी या खून की उल्टी आए।
पेट फूलना या गैस की समस्या बनी रहे।
ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
एसिडिटी से बचाव और सही इलाज
तली-भुनी और मसालेदार चीजों से बचें।
नियमित रूप से हल्का, सुपाच्य भोजन करें।
खाने के बाद तुरंत न लेटें।
धूम्रपान और शराब का त्याग करें।
तनाव कम करने के लिए योग और मेडिटेशन करें।
डॉक्टर की सलाह से ही दवाइयां लें, खासकर अगर एसिडिटी अधिक समय तक बनी रहे।
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