शरीर में किसी भी पोषक तत्व की कमी होने पर उसका असर हमारी सेहत पर ज़रूर पड़ता है। लेकिन जब बात कैल्शियम की हो, तो इसका सीधा असर हड्डियों, दांतों और मांसपेशियों पर होता है। खासतौर पर बच्चों के विकास में कैल्शियम की भूमिका बेहद अहम होती है। इसकी कमी से बच्चों की ग्रोथ धीमी हो सकती है, और वे बार-बार बीमार भी पड़ सकते हैं।
⚠️ बच्चों में कैल्शियम की कमी के 3 प्रमुख संकेत
1. पैरों में दर्द और बेचैनी
अगर बच्चे को रात में पैरों (खासकर पिंडलियों) में दर्द की शिकायत होती है या मांसपेशियों में बार-बार खिंचाव आता है, तो यह कैल्शियम की कमी का इशारा हो सकता है। यह दर्द अक्सर रात के समय ज्यादा महसूस होता है।
2. नाखूनों में सफेद धब्बे
बच्चों के नाखूनों पर सफेद-से धब्बे दिखाई देना, या नाखूनों का आसानी से टूट जाना, शरीर में कैल्शियम की कमी को दर्शाता है। ये लक्षण मामूली दिख सकते हैं लेकिन इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
3. चिड़चिड़ापन और मूड स्विंग्स
कैल्शियम की कमी से बच्चों का मस्तिष्क भी प्रभावित होता है। वे बार-बार चिड़चिड़े हो सकते हैं, गुस्से में रह सकते हैं और उनका मूड बार-बार बदल सकता है। लंबे समय तक यह समस्या रहने से न्यूरोलॉजिकल परेशानी भी हो सकती है।
अन्य संकेत भी हो सकते हैं:
मांसपेशियों में अकड़न या ऐंठन
हर समय थकान और कमजोरी
पढ़ाई में मन न लगना
🧠 क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
डॉक्टरों के अनुसार, हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए सिर्फ कैल्शियम ही नहीं बल्कि विटामिन-डी भी जरूरी होता है। विटामिन-डी3 शरीर को कैल्शियम को अच्छे से अवशोषित करने में मदद करता है। इसलिए कैल्शियम के साथ-साथ विटामिन-डी लेना भी ज़रूरी है।
🥦 बच्चों की डाइट कैसी होनी चाहिए?
1. डेयरी प्रोडक्ट्स:
गाय या भैंस का दूध, दही, पनीर बच्चों की डाइट में शामिल करें।
2. हरी पत्तेदार सब्जियां:
पालक, मेथी, सरसों का साग जैसे आयरन और कैल्शियम से भरपूर सब्जियां।
3. नट्स और बीज:
बादाम, तिल, चिया सीड्स जैसे सूखे मेवे और बीज कैल्शियम का अच्छा स्रोत हैं।
4. अनाज और दालें:
रागी, चना, राजमा, लोबिया जैसी चीज़ें हड्डियों को मज़बूत बनाने में मददगार होती हैं।
5. धूप लेना न भूलें:
विटामिन-डी के लिए रोज़ाना कुछ समय तक सुबह की धूप में बैठना फायदेमंद होता है।
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