भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) को चालू वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर) में 1,357 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ है। यह खुलासा दूरसंचार राज्य मंत्री पेम्मासानी चंद्रशेखर ने लोकसभा में लिखित जवाब में किया। सरकार ने 2022 से अब तक तीन रिवाइवल पैकेजों में कुल 3.24 लाख करोड़ रुपये की मदद दी, 4G-5G रोलआउट के लिए TCS को ठेका दिया, फिर भी सरकारी टेलीकॉम कंपनी निजी प्रतिद्वंद्वियों के सामने घुटने टेक रही है। जियो और एयरटेल जहां हर तिमाही हजारों करोड़ का मुनाफा कमा रहे हैं, वहीं BSNL का घाटा कम होने के बजाय बढ़ता जा रहा है।
मंत्री ने बताया कि अप्रैल-सितंबर 2025 में BSNL का परिचालन घाटा (EBITDA) भी नेगेटिव रहा। कंपनी का कुल रेवेन्यू इस अवधि में करीब 9,800 करोड़ रुपये रहा, जबकि खर्च 11,150 करोड़ रुपये से ज्यादा। सबसे बड़ा झटका कर्मचारी खर्च (7,200 करोड़) और स्पेक्ट्रम किस्तों (2,100 करोड़) से लगा। हालांकि सरकार ने VRS के जरिए कर्मचारियों की संख्या 3.2 लाख से घटाकर 62 हजार कर दी थी, लेकिन सैलरी बिल अभी भी 70% से ज्यादा रेवेन्यू खा रहा है।
सरकार की मेहनत क्यों गई पानी में?
2022 में पहला पैकेज: ₹69,000 करोड़
2023 में दूसरा: ₹89,000 करोड़
2024 में तीसरा: ₹1.64 लाख करोड़ (4G-5G के लिए)
कुल मदद: ₹3.24 लाख करोड़
इतनी बड़ी रकम के बावजूद BSNL अभी तक अपना स्वदेशी 4G नेटवर्क लॉन्च नहीं कर पाया है। TCS-C-DOT कंसोर्टियम को 2024 में ठेका मिला था, लेकिन पायलट प्रोजेक्ट पंजाब में ही अटका है। जियो-एयरटेल ने इसी बीच 5G पूरे देश में फैला दिया। BSNL के पास 1.18 लाख टावर हैं, लेकिन सिर्फ 28,000 पर 4G उपकरण लगे हैं।
ग्राहक भी छोड़ रहे साथ
सितंबर 2025 तक BSNL के मोबाइल सब्सक्राइबर्स घटकर 8.92 करोड़ रह गए, जबकि जियो के 46 करोड़ और एयरटेल के 39 करोड़ से ज्यादा हैं। TRAI डेटा के मुताबिक हर महीने औसतन 12-15 लाख ग्राहक BSNL छोड़ रहे हैं। वजह – नेटवर्क कवरेज कमजोर, इंटरनेट स्पीड धीमी और 5G का इंतजार।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
पूर्व दूरसंचार सचिव जेएस दीपक ने कहा,
“सरकार ने पैसा तो डाला, लेकिन मैनेजमेंट और टेक्नोलॉजी में सुधार नहीं हुआ। BSNL में अभी भी पुरानी सोच और अफसरशाही हावी है। जब तक प्रोफेशनल CEO और बोर्ड नहीं आएगा, हालात नहीं बदलेंगे।”
सरकार का दावा
मंत्री ने सदन में कहा, “2026 तक पूरे देश में 1 लाख 4G साइट्स लग जाएंगी। 5G अपग्रेड भी प्लान में है।” लेकिन विपक्ष ने हंगामा किया और पूछा, “तीन साल से 4G का इंतजार है, अब 5G कब तक?”
निवेशकों-ग्राहकों में निराशा
शेयर बाजार में MTNL (BSNL की सहयोगी) का शेयर पिछले एक साल में 45% टूट चुका है। ग्रामीण इलाकों में BSNL अभी भी मजबूत है, लेकिन शहरी युवा उसे “स्लो नेटवर्क” कहकर मजाक उड़ा रहे हैं।
कुल मिलाकर सरकार की सारी कोशिशें अभी तक रंग नहीं ला पाई हैं। 1,357 करोड़ का यह ताजा घाटा साफ बता रहा है कि BSNL को बचाने के लिए सिर्फ पैसा नहीं, पूरा सिस्टम बदलने की जरूरत है। अब सवाल यह है – क्या 2026 तक BSNL जियो-एयरटेल को टक्कर दे पाएगा, या सरकारी खजाने का यह पैसा फिर पानी में जाएगा?
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