ब्रेन से जुड़ी बीमारियाँ अक्सर अचानक होती हैं और सेकंडों में जानलेवा साबित हो सकती हैं। इनमें सबसे गंभीर स्थितियाँ हैं — ब्रेन स्ट्रोक (Brain Stroke) और ब्रेन हैमरेज (Brain Hemorrhage)। दोनों ही स्थितियाँ मस्तिष्क में रक्त संचार के असंतुलन से जुड़ी हैं, लेकिन इनके कारण, लक्षण और इलाज अलग-अलग होते हैं। सही समय पर सही पहचान और कदम उठाने से जान बचाई जा सकती है। आइए जानते हैं इन दोनों के बीच का अंतर और अटैक के वक्त क्या करना चाहिए।
ब्रेन स्ट्रोक क्या है?
ब्रेन स्ट्रोक तब होता है जब मस्तिष्क तक रक्त की आपूर्ति रुक जाती है या बहुत कम हो जाती है। इससे दिमाग के सेल्स को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और वे मरने लगते हैं।
इसे दो प्रकारों में बाँटा जाता है:
- इसकीमिक स्ट्रोक (Ischemic Stroke): जब ब्लड क्लॉट (थक्का) किसी आर्टरी को ब्लॉक कर देता है।
- हेमरेजिक स्ट्रोक (Hemorrhagic Stroke): जब मस्तिष्क की रक्त वाहिका फट जाती है और रक्तस्राव होता है।
ब्रेन हैमरेज क्या है?
ब्रेन हैमरेज यानी मस्तिष्क में रक्तस्राव। यह स्ट्रोक का ही एक गंभीर रूप है, जिसमें किसी आर्टरी या वेसल के फटने से मस्तिष्क के अंदर या आसपास खून भर जाता है।
यह रक्तस्राव मस्तिष्क के ऊतकों पर दबाव डालता है, जिससे दिमाग के कामकाज पर बुरा असर पड़ता है।
दोनों में मुख्य अंतर
| तुलना का बिंदु | ब्रेन स्ट्रोक | ब्रेन हैमरेज |
|---|---|---|
| कारण | रक्त प्रवाह का रुकना (ब्लड क्लॉट या ब्लॉकेज) | रक्त वाहिका फटने से खून का बहना |
| प्रभाव | मस्तिष्क के हिस्से में ऑक्सीजन की कमी | मस्तिष्क पर रक्त का दबाव बढ़ना |
| लक्षण | अचानक बोलने में परेशानी, शरीर के एक तरफ कमजोरी, चक्कर | सिरदर्द, उल्टी, बेहोशी, तेज दबाव |
| इलाज | ब्लड थिनर, ब्लड क्लॉट हटाने की दवा | रक्तस्राव रोकने और सर्जरी की ज़रूरत |
| जोखिम कारक | हाई BP, डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल | ब्लड प्रेशर, सिर की चोट, स्ट्रेस |
अटैक आने पर क्या करें?
ब्रेन अटैक के पहले कुछ मिनट बेहद अहम होते हैं। अगर तुरंत सही कदम उठाए जाएं, तो जान बचाई जा सकती है।
1. चेहरे पर असंतुलन देखें: एक तरफ झुकाव या मुस्कान गायब होना।
2. हाथ उठाने को कहें: अगर एक हाथ ऊपर नहीं उठ पा रहा, तो स्ट्रोक का संकेत है।
3. बात करने की क्षमता जांचें: अस्पष्ट या तुतलाती आवाज भी चेतावनी हो सकती है।
4. तुरंत अस्पताल पहुँचें: हर मिनट मायने रखता है — “गोल्डन ऑवर” (पहला घंटा) में इलाज मिलने से बचाव की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
5. खुद से कोई दवा न लें: बिना डॉक्टर की सलाह ब्लड थिनर लेना जानलेवा हो सकता है।
किन लोगों को ज्यादा खतरा है
- हाई ब्लड प्रेशर या शुगर के मरीज
- अधिक धूम्रपान या शराब सेवन करने वाले
- मोटापे या हार्ट डिज़ीज़ से ग्रस्त लोग
- उम्रदराज़ व्यक्ति (60 वर्ष से ऊपर)
रोकथाम कैसे करें
- ब्लड प्रेशर और शुगर को नियंत्रित रखें
- नियमित व्यायाम करें
- संतुलित आहार लें, जंक फूड से बचें
- तनाव कम करें और पर्याप्त नींद लें
- साल में एक बार हेल्थ चेकअप ज़रूर करवाएं
ब्रेन स्ट्रोक और ब्रेन हैमरेज दोनों ही गंभीर स्थितियाँ हैं, लेकिन समय रहते पहचाने जाने पर इलाज संभव है। अगर कभी अचानक किसी को बोलने, चलने या समझने में दिक्कत हो, चेहरे पर टेढ़ापन आए या सिर में तेज दर्द महसूस हो — तो इसे हल्के में न लें।
तुरंत अस्पताल पहुँचना ही जीवन बचाने का सबसे बड़ा कदम है।
Navyug Sandesh Hindi Newspaper, Latest News, Findings & Fact Check