BMC चुनाव: 25 साल का हिसाब‑किताब, शिवसेना‑बीजेपी में होर्डिंग वॉर तेज़

बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव 2026 से पहले शहर का राजनीतिक वातावरण पहले से कहीं अधिक गर्म नजर आ रहा है, जहाँ बीजेपी और शिवसेना के बीच होर्डिंग वॉर (चुनावी होर्डिंगों, बैनरों और पोस्टरों को लेकर सियासी टकराव) ने इस चुनावी प्रक्रिया में एक नई तीव्रता ला दी है। इस चुनाव को पिछले 25 वर्षों का एक बड़ा राजनीतिक हिसाब‑किताब माना जा रहा है, जिसमें दोनों ही दलों ने मुंबई की सत्ता पर अपना कब्‍जा मजबूत करने के लिये रणनीतिक प्रचार का जोर दे रखा है।

बीएमसी, जिसे अक्सर “भारत की सबसे बड़ी स्थानीय निकाय” कहा जाता है, में कुल 227 वार्ड हैं, और इस बार की चुनावी लड़ाई में बीजेपी और शिवसेना (शिंदे गुट) के बीच सीट शेयरिंग और प्रचार सामग्री पर व्यापक मतभेद देखने को मिल रहे हैं। अंततः दोनों पक्षों ने सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय किया है जिसमें बीजेपी लगभग 137 सीटों पर चुनाव लड़ेगी जबकि शिवसेना 90 सीटों पर मैदान में उतरेगी, लेकिन इसके लिये संघर्ष और मतभेद बहुत दिन पहले ही शुरू हो गए थे।

शहर के मुख्य मार्गों और चौराहों पर लगाए जा रहे चुनावी होर्डिंग एवं पोस्टरों ने राजनीतिक बातचीत को उग्र रूप दे दिया है। दोनों पार्टियाँ अपने अपने घोषणापत्र, विकास वादा और पिछले कार्यकालों के दावों का प्रचारात्मक रूप से सामना कर रही हैं, जिससे जनता के बीच राजनीतिक संदेशों की झड़ी लगी हुई है। यह प्रचार केवल पारंपरिक पोस्टर तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़े‑बड़े होर्डिंग बैनर के ज़रिये दोनों दल अपने समर्थकों के बीच अपनी ताकत का एहसास करा रहे हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि यह कठिन चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले 25 वर्षों से बीएमसी में सत्ता के केंद्र में रहने वाली शिवसेना का जनाधार और बीजेपी की राजनीति दोनों ही लगातार बदलते सामाजिक और आर्थिक मुद्दों के बीच सत्ता हासिल करने के लिये संघर्ष कर रहे हैं। पार्टी नेताओं के बयान और प्रचार सामग्री में एक‑दूसरे पर सीधे आरोप‑प्रत्यारोप भी देखे जा रहे हैं, जिनमें भ्रष्टाचार, विकास के वादों में असफलता, और स्थानीय समस्याओं के समाधान को लेकर कटाक्ष शामिल हैं।

राजनीतिक समीकरणों में इस बार महायुति गठबंधन (जिसमें बीजेपी और शिवसेना शामिल हैं) की भूमिका भी महत्वपूर्ण बनी हुई है। हालांकि गठबंधन में सीट शेयरिंग फॉर्मूला तय हो चुका है, किन्तु प्रचार सामग्री और होर्डिंग प्लेसमेंट को लेकर दोनों दलों के स्थानीय कार्यकर्ता और समर्थक आपस में भिड़ते देखे जा रहे हैं, जिससे शहर के कई हिस्सों में होर्डिंग विवाद और टकराव की स्थिति बन गई है।

भाजपा की ओर से यह दावा किया गया है कि पिछले कुछ वर्षों में महापालिका के विकास कार्यों को प्राथमिकता दी गई है, और इसी आधार पर वह शहर के मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने में लगी है। दूसरी ओर शिवसेना के नेताओं का कहना है कि पिछले कार्यकाल में उनकी पार्टी ने कई स्थानीय मुद्दों जैसे सड़क और जल प्रबंधन, स्वास्थ्य तथा नागरिक सुविधाओं में सुधार के लिये काम किया है, और यह दावा प्रचार सामग्री में प्रमुखता से उभर रहा है।

इन सभी रणनीतियों और प्रचार के बीच मतदाताओं के बीच जागरूकता और आलोचनात्मक दृष्टिकोण भी उभर रहा है। शहर में सामान्य नागरिक इस बार केवल होर्डिंग और पोस्टरों तक ही नहीं, बल्कि राजनीतिक दलों के 25 साल के रिकॉर्ड और उपलब्धियों को भी बारीकी से देख रहे हैं। यह चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि यह केवल एक स्थानीय निकाय का चुनाव नहीं रहा, बल्कि शहर के भविष्य के प्रशासन और विकास की दिशा को तय करने वाला एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।

मतदाता, विश्लेषक और राजनीतिक विशेषज्ञ सभी इस चुनाव को एक बड़े राजनीतिक रिफ्लेक्शन ऑफ़ हिस्ट्री के रूप में देख रहे हैं, जहाँ बीएमसी के पिछले दो दशकों के अनुभव और आगामी 5 साल के लिये नेतृत्व का चयन एक निर्णायक भूमिका निभाएगा।

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