बॉलीवुड की दुनिया में कुछ जोड़ियां ऐसी होती हैं, जो वक़्त के साथ-साथ फिक्शन से निकलकर एक एहसास बन जाती हैं। रेखा और अमिताभ बच्चन की जोड़ी भी उन्हीं में से एक है — रोमांस, रहस्य, और रियलिटी से लिपटी हुई एक सिनेमाई दास्तान, जिसे दर्शकों ने सिर आंखों पर बिठाया।
1970 और 80 के दशक में जब ये दोनों सितारे परदे पर आते, तो सिनेमाघरों में सीटें भर जातीं और बाहर टिकट ब्लैक में बिकते। आज भी जब इनकी फिल्में टीवी पर आती हैं, तो लोग रिमोट नहीं बदलते — क्योंकि ये सिर्फ फिल्में नहीं, एक दौर की यादें हैं।
वो फिल्म जिसने बदला ‘बिग बी’ का मुकद्दर
1978 में आई फिल्म “मुकद्दर का सिकंदर” ना केवल बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट रही, बल्कि अमिताभ बच्चन के करियर की दिशा ही बदल गई। इस फिल्म में रेखा ने एक कोठेवाली ‘जोहरा बाई’ का किरदार निभाया था और अमिताभ उस दर्दभरे प्रेमी की भूमिका में थे, जो अपनी मोहब्बत को कभी कह नहीं पाता।
उन दोनों के बीच संवादों में जितनी खामोशी थी, उतनी ही गहराई भी। आज भी जब “रोटियों की तलाश में निकला था मैं… मोहब्बत रास्ते में मिल गई” डायलॉग गूंजता है, तो सिनेमा हॉल तालियों से गूंज उठते हैं।
‘सिलसिला’ – रील और रियल का मिलन
1981 में यश चोपड़ा द्वारा निर्देशित फिल्म “सिलसिला” को दर्शकों ने एक अलग ही नज़र से देखा। कहा जाता है कि यह फिल्म रेखा, जया और अमिताभ के रियल लाइफ रिलेशनशिप्स से प्रेरित थी। फिल्म में अमिताभ एक ऐसे पुरुष की भूमिका में हैं जो अपनी पत्नी और प्रेमिका के बीच फंसा होता है। रेखा और जया बच्चन का आमना-सामना और उनके डायलॉग्स आज भी सिने प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय हैं।
अन्य यादगार फिल्में – हर बार दिल छूने वाली
सुहाग (1979) – एक्शन और ड्रामा से भरपूर ये फिल्म भी दोनों की हिट फिल्मों में से एक रही।
मि. नटवरलाल (1979) – इसमें रेखा का ग्लैमर और अमिताभ की चतुराई, दर्शकों को खूब भायी।
राम बलराम (1980) – इस फिल्म में दोनों की केमिस्ट्री ने एक बार फिर साबित कर दिया कि ये जोड़ी क्यों खास है।
इमान धरम, दो अंजाने, खूबसूरत और गंगा की सौगंध जैसी कई और फिल्में हैं जिन्होंने दर्शकों के दिलों में अपनी जगह बनाई।
सिनेमा से ज़्यादा एक अहसास
रेखा और अमिताभ की जोड़ी सिर्फ फिल्मी पर्दे तक सीमित नहीं रही। इनकी ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री इतनी गहरी थी कि लोग उसे असल मान बैठे। भले ही दोनों कलाकारों ने कभी सार्वजनिक रूप से अपने रिश्ते को स्वीकार नहीं किया, लेकिन उनकी फिल्मों में वो भाव, वो नज़ाकत, और वो ‘न कह पाने’ की कसक हमेशा झलकती रही।
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