बिना NEET बने डॉक्टर! तिब्बती मेडिसिन ‘सोवा-रिग्पा’ है नया विकल्प

NEET UG 2025 का रिजल्ट आ चुका है, और इसके साथ ही भारत के मेडिकल कॉलेजों में MBBS, BDS, BHMS जैसे कोर्सेस के लिए दाखिले की रेस शुरू हो चुकी है। लाखों छात्रों में से गिने-चुने ही डॉक्टर बनने का सपना पूरा कर पाएंगे। लेकिन क्या डॉक्टर बनने का रास्ता सिर्फ NEET से होकर ही गुजरता है? जी नहीं! अगर आपका NEET में चयन नहीं हुआ है, तो भी आप “डॉक्टर” बन सकते हैं – सोवा-रिग्पा से।

📉 नीट का कटु सत्य
हर साल NEET में करीब 20 लाख छात्र शामिल होते हैं, जिसमें से लगभग 60% पास होते हैं। मगर मेडिकल की कुल सीटें 1.20 लाख के आस-पास ही हैं। इसका मतलब है कि 19 में से 18 छात्रों को हर साल मायूसी मिलती है। लेकिन अब एक और रास्ता खुला है – सोवा-रिग्पा के ज़रिए डॉक्टर बनने का।

🧘‍♂️ क्या है सोवा-रिग्पा?
सोवा-रिग्पा एक प्राचीन तिब्बती चिकित्सा पद्धति है, जो आयुर्वेद से प्रभावित और वैज्ञानिक आधार पर विकसित चिकित्सा प्रणाली है। इसका इस्तेमाल खासकर तिब्बत, भारत (हिमालयी क्षेत्र), नेपाल, भूटान, चीन और मंगोलिया में होता आया है। इस पद्धति में भी अश्वगंधा, त्रिफला, गुग्गुल जैसे आयुर्वेदिक तत्वों का इस्तेमाल होता है।

भारत सरकार ने 2010 में सोवा-रिग्पा को आधिकारिक मान्यता दी, और यह अब आयुष मंत्रालय के अंतर्गत आता है। यानी इस पद्धति से ग्रेजुएशन करके आप “आयुष डॉक्टर” बन सकते हैं।

🎓 भारत के प्रमुख सोवा-रिग्पा संस्थान
राष्ट्रीय सोवा रिग्पा संस्थान, लेह

मेन-त्सी-खांग, बेंगलुरु

केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान (CIHTS), वाराणसी

ये संस्थान तिब्बती मेडिसिन की पढ़ाई कराते हैं। यहाँ दाखिले के लिए नेशनल कमीशन फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन (NCISM) हर साल एक प्रवेश परीक्षा आयोजित करता है – NCISM-NEET-SR-UG।

📅 इस साल के लिए आवेदन प्रक्रिया
आवेदन शुरू: 15 जून 2025

आवेदन की आखिरी तारीख: 15 जुलाई 2025

परीक्षा तिथि: 27 जुलाई 2025 (रविवार)

परीक्षा केंद्र: देश के 7 शहरों में

आवेदन वेबसाइट: cihts.ac.in

परीक्षा की मेरिट के आधार पर सोवा-रिग्पा में ग्रेजुएशन (BAMS टाइप) के लिए सीट आवंटन किया जाएगा।

🩺 NEET नहीं तो क्या? डॉक्टर बनने का दूसरा रास्ता यहीं है!
अगर NEET में कामयाबी नहीं मिली है, तो निराश न हों। सोवा-रिग्पा एक शानदार विकल्प है, जिसमें आप डॉक्टर बनने के साथ-साथ एक समृद्ध पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली के संरक्षक भी बन सकते हैं।

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