इन नंबरों से आ रही कॉल तो हो जाएं सावधान, बैंक अधिकारी बनकर कर रहे ठगी

देशभर में साइबर ठगों का जाल दिनों-दिन फैलता जा रहा है। अब ये ठग सिर्फ मेसेज या लिंक के जरिए नहीं, बल्कि सीधे फोन कॉल कर लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं। एक गलत नंबर डायल करना या किसी अनजान कॉल पर भरोसा करना — और आपका खाता चुटकियों में खाली हो सकता है। हाल ही में सामने आई रिपोर्ट्स के अनुसार, इन फर्जी कॉल्स के ज़रिए देशभर में हर महीने करोड़ों रुपये की ठगी की जा रही है।

कैसे करते हैं साइबर ठग वारदात को अंजाम?

साइबर अपराधी खुद को कभी बैंक अधिकारी, कभी मोबाइल कंपनी के प्रतिनिधि, तो कभी केवाईसी अपडेट करने वाला बताकर लोगों को फोन करते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य होता है – आपसे व्यक्तिगत जानकारी, OTP, या बैंक डिटेल्स हासिल करना।

कुछ मामलों में, लोग गलती से फर्जी कस्टमर केयर नंबर गूगल पर सर्च कर लेते हैं और उसी पर कॉल कर बैठते हैं। कॉल उठाने वाला व्यक्ति खुद को संबंधित कंपनी का प्रतिनिधि बताकर आपकी मदद करने का नाटक करता है और फिर धीरे-धीरे आपके अकाउंट से पैसे निकाल लेता है।

इन नंबरों से रहें सावधान!

हाल ही में भारतीय साइबर क्राइम सेल ने ऐसे सैकड़ों फर्जी नंबरों की पहचान की है जो विभिन्न सरकारी विभागों, बैंकों, UPI सेवाओं और मोबाइल कंपनियों के नाम पर ऑनलाइन मौजूद हैं। इनमें से कई नंबर गूगल या सोशल मीडिया पर प्रमोट किए जा रहे हैं ताकि कोई भी व्यक्ति आसानी से उन पर कॉल कर बैठे।

महत्वपूर्ण सलाह: कोई भी नंबर डायल करने से पहले सरकारी वेबसाइट, बैंक की ऑफिशियल वेबसाइट, या कंपनी के ऐप से ही नंबर वेरिफाई करें।

ये गलती न करें:

किसी अनजान नंबर से आए कॉल पर अपने बैंक या पर्सनल डिटेल्स साझा न करें।

OTP, UPI पिन, या ATM नंबर किसी से भी शेयर न करें — बैंक भी नहीं मांगता।

सोशल मीडिया या गूगल पर कस्टमर केयर नंबर ढूंढने से बचें।

कोई एप्लिकेशन (AnyDesk, QuickSupport आदि) इंस्टॉल करने को कहे, तो सावधान हो जाएं।

क्या कहती है पुलिस और साइबर सेल?

साइबर सेल अधिकारियों के अनुसार, अब ठग न केवल हिंदी, बल्कि क्षेत्रीय भाषाओं में भी बात करते हैं ताकि भरोसा जता सकें। वे कॉल्स को इतने पेशेवर तरीके से स्क्रिप्ट करते हैं कि सामने वाला आसानी से भ्रमित हो जाता है।

अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि अगर कोई फर्जी कॉल या फ्रॉड का शिकार होता है, तो तुरंत 1930 पर कॉल कर या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।

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