सर्दियों के मौसम में तापमान गिरते ही हीटर की मांग तेज़ हो जाती है। बाजारों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर तरह-तरह के हीटर उपलब्ध हैं, लेकिन जल्दबाज़ी या जानकारी के अभाव में किया गया गलत चुनाव न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचा सकता है, बल्कि सुरक्षा के लिहाज़ से भी खतरनाक साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि हीटर खरीदते समय कुछ आम गलतियों से बचना बेहद ज़रूरी है।
सबसे बड़ी गलती जरूरत से ज्यादा पावर वाला हीटर खरीदना है। कई लोग सोचते हैं कि ज्यादा वॉट का हीटर कमरे को जल्दी गर्म करेगा, लेकिन इससे बिजली की खपत काफी बढ़ जाती है। छोटे या मध्यम आकार के कमरे के लिए अत्यधिक क्षमता वाला हीटर न केवल बिजली बिल बढ़ाता है, बल्कि वायरिंग पर भी अतिरिक्त दबाव डालता है, जिससे शॉर्ट सर्किट का खतरा बना रहता है।
दूसरी आम चूक सुरक्षा फीचर्स को नज़रअंदाज़ करना है। कई सस्ते हीटरों में ऑटो कट-ऑफ, ओवरहीट प्रोटेक्शन और टिप-ओवर सेफ्टी जैसे फीचर्स नहीं होते। ऐसे हीटर लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर आग लगने या दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। उपभोक्ताओं को हमेशा ISI मार्क या प्रमाणित ब्रांड का हीटर ही चुनना चाहिए।
वेंटिलेशन की अनदेखी भी एक गंभीर समस्या है। खासतौर पर गैस या केरोसिन से चलने वाले हीटर बंद कमरे में ऑक्सीजन की कमी पैदा कर सकते हैं, जिससे सिरदर्द, घबराहट या गंभीर मामलों में दम घुटने जैसी स्थिति बन सकती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि ऐसे हीटरों का इस्तेमाल करते समय कमरे में उचित वेंटिलेशन होना चाहिए।
एक और बड़ी गलती केवल कीमत देखकर हीटर खरीद लेना है। सस्ता हीटर शुरुआत में आकर्षक लग सकता है, लेकिन उसकी टिकाऊपन और ऊर्जा दक्षता अक्सर कम होती है। लंबे समय में यह ज्यादा खर्च का कारण बन सकता है। ऊर्जा दक्ष (Energy Efficient) हीटर भले ही थोड़े महंगे हों, लेकिन वे बिजली की बचत करते हैं और ज्यादा सुरक्षित भी होते हैं।
इसके अलावा, हीटर को गलत जगह पर रखना भी जोखिम भरा हो सकता है। पर्दों, बिस्तर या ज्वलनशील वस्तुओं के पास हीटर रखना आग लगने की संभावना बढ़ा देता है। बच्चों और पालतू जानवरों वाले घरों में हीटर की ऊंचाई और दूरी का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
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