असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने घोषणा की है कि 1 अप्रैल 2026 से कक्षा 8 तक असम का इतिहास अनिवार्य रूप से पढ़ाया जाएगा। ब्रह्मपुत्र घाटी के स्कूलों में असमिया भाषा को अनिवार्य किया जाएगा, जबकि बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र (BTR) में असमिया और बोडो भाषा को एक विषय के रूप में पढ़ाया जाएगा। इस फैसले पर केंद्रीय गृह मंत्रालय से चर्चा हो चुकी है और इसे मौजूदा विधानसभा सत्र में पेश किया जाएगा।
इस बार असम विधानसभा का सत्र पहली बार गुवाहाटी के बाहर कोकराझार में आयोजित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने इस ऐतिहासिक फैसले का पूरा समर्थन किया है और बोडोलैंड क्षेत्र में शांति स्थापित करने में उनका बड़ा योगदान रहा है।
कैबिनेट के अहम फैसले:
असम का इतिहास अनिवार्य: कक्षा 8 तक असम का इतिहास पढ़ना अनिवार्य होगा।
सरकारी अधिसूचनाएं असमिया में: अप्रैल 2026 से राज्य सरकार अंग्रेजी के साथ-साथ असमिया भाषा में भी सभी नोटिस प्रकाशित करेगी।
तिवा स्वायत्त परिषद का विस्तार: सीटों की संख्या 36 से बढ़ाकर 42 की जाएगी।
नया राष्ट्रीय उद्यान: बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र में 316 वर्ग किमी में फैले 8वें राष्ट्रीय उद्यान को मंजूरी दी गई।
शिक्षा के क्षेत्र में विस्तार:
तेजपुर विश्वविद्यालय में असमिया विभाग खुलेगा।
शिलांग स्थित असम विश्वविद्यालय में लक्ष्मीनाथ बेजबरुआ की सीट स्थापित होगी।
बोडोलैंड में स्वामी विवेकानंद विश्वविद्यालय (निजी) को मंजूरी मिली।
भूमि सुरक्षा नीति: चुनिंदा राजस्व ब्लॉकों में केवल वे लोग ही जमीन खरीद सकेंगे, जो 1951 से (तीन पीढ़ियों से) गांवों में रह रहे हैं।
धार्मिक स्थलों की सुरक्षा: असम के नामघर, सत्र आदि की सुरक्षा सुनिश्चित करने का फैसला लिया गया।
नए सरकारी पद: भूमि मामलों के निपटारे के लिए 2,000 नए पद सृजित होंगे।
शंकरदेव कलाक्षेत्र को फंड: श्रीमंत शंकरदेव कलाक्षेत्र के लिए 100 करोड़ रुपये आवंटित किए गए।
असम समझौते पर नई पहल
असम समझौते के अनुच्छेद 6 पर रिपोर्ट सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति बिप्लब शर्मा की अध्यक्षता में पेश की गई है। इस पर सरकार ने बातचीत शुरू कर दी है। सितंबर में पहली बैठक हुई थी और अब दूसरी बैठक भी पूरी हो चुकी है। मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि असम की धरती पर असमिया लोगों की संप्रभुता को सुनिश्चित करना प्राथमिकता है और जब तक उनकी भाषा, संस्कृति, भूमि अधिकार, राजनीतिक और आर्थिक अधिकार सुरक्षित नहीं हो जाते, तब तक सरकार चैन से नहीं बैठेगी।
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