असम में सियासी परिदृश्य एक बार फिर गरमाया हुआ है। राज्य के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी के बयान पर करारा जवाब दिया। ओवैसी ने हाल ही में केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हिंदू और हिजाब मुद्दों को लेकर टिप्पणी की थी, जिसके जवाब में सरमा ने कहा कि “उनके दिमाग में ट्यूबलाइट जलती है।”
मुख्यमंत्री सरमा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि राजनीतिक नेताओं को विवादास्पद बयान देने से पहले सोच-समझकर बोलना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिजाब और हिंदू मुद्दे देश की सामाजिक एकता और संवैधानिक मूल्यों से जुड़े हैं, और इसे राजनीतिक फायदे के लिए मोड़ना ठीक नहीं है।
ओवैसी ने केंद्र सरकार और पीएम मोदी की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा था कि कुछ फैसलों में धार्मिक और सामाजिक वर्गों के बीच भेदभाव की आशंका है। उन्होंने हिजाब पर लगे कुछ प्रतिबंधों और हिंदू संरक्षण कानूनों पर भी आलोचना की थी। इस बयान के बाद असम में राजनीतिक हलचल तेज हो गई और मुख्यमंत्री सरमा ने पलटवार करते हुए कहा कि देश की जनता को भ्रमित करने की कोशिश न की जाए।
सरमा ने अपने बयान में यह भी जोड़ा कि “राजनीतिक बयानबाजी में तथ्य और तर्क का होना आवश्यक है। बिना आधार के आरोप और आलोचना केवल समाज में तनाव पैदा करते हैं।” उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार सभी समुदायों के हितों को ध्यान में रखकर नीति निर्णय ले रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ओवैसी और सरमा के बीच यह टकराव आगामी चुनावी रणनीतियों और सियासी बहसों को भी प्रभावित कर सकता है। हिजाब और हिंदू मुद्दे जैसे संवेदनशील विषय हमेशा से राजनीतिक विमर्श का हिस्सा रहे हैं, लेकिन उनके बीच की रंजिश और बयानबाज़ी ने इसे और तेज कर दिया है।
सोशल मीडिया पर भी इस विवाद ने काफी हलचल मचाई है। समर्थक और विरोधी दोनों ही पक्षों ने अपने-अपने विचार साझा किए। कुछ लोग सरमा के तंज़ और करारे जवाब की सराहना कर रहे हैं, तो कुछ ओवैसी के बयान का समर्थन कर रहे हैं। इस तरह की बहस ने असम और पूरे देश में राजनीतिक चर्चाओं को नई दिशा दे दी है।
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