हिंदी सिनेमा के प्रख्यात अभिनेता और हास्य शैली के अनमोल सितारे गोवर्धन असरानी, जिन्हें दर्शक स्नेहपूर्वक केवल “असरानी” के नाम से जानते हैं, अब हमारे बीच नहीं रहे। अभिनेता ने मुंबई स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। वे 83 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे।
उनके निधन की खबर सामने आते ही फिल्म इंडस्ट्री, उनके प्रशंसकों और सहयोगियों में शोक की लहर दौड़ गई। सोशल मीडिया से लेकर इंडस्ट्री गलियारों तक असरानी को श्रद्धांजलि देने का सिलसिला शुरू हो गया है।
50 वर्षों से अधिक का रहा अभिनय करियर
असरानी का करियर लगभग पांच दशकों तक फैला रहा, जिसमें उन्होंने 300 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया। उन्होंने हिंदी, गुजराती, पंजाबी और तेलुगु भाषाओं की फिल्मों में काम किया और हर किरदार को अपने अनोखे अंदाज में निभाया।
वर्ष 1975 में ‘शोले’ में निभाया गया जेलर का किरदार आज भी हिंदी सिनेमा के सबसे यादगार कॉमिक रोल्स में शुमार किया जाता है। उनकी संवाद शैली, एक्सप्रेशन और टाइमिंग ने उन्हें हास्य अभिनय का पर्याय बना दिया था।
हास्य से लेकर गंभीर भूमिकाएं भी निभाईं
हालांकि असरानी को आमतौर पर कॉमिक रोल्स के लिए जाना जाता है, लेकिन उन्होंने कई फिल्मों में गंभीर भूमिकाएं भी निभाई थीं। ‘अभिमान’, ‘खुशबू’, ‘चुपके चुपके’, ‘बावर्ची’ जैसी फिल्मों में उनका अभिनय दर्शकों के दिलों को छू गया।
वे राजेश खन्ना, अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, रेखा, हेमा मालिनी जैसे दिग्गजों के साथ कई बार पर्दे पर नजर आए और हर बार अपनी छाप छोड़ी।
फिल्म जगत में शोक की लहर
उनके निधन की खबर सामने आने के बाद अमिताभ बच्चन, शबाना आज़मी, अनुपम खेर, जॉनी लीवर समेत कई दिग्गजों ने शोक व्यक्त किया। अमिताभ ने ट्वीट कर लिखा, “एक युग समाप्त हुआ। असरानी जी न केवल हास्य के सम्राट थे, बल्कि एक सज्जन और सच्चे कलाकार भी थे।”
निजी जीवन और अंतिम विदाई
असरानी का जन्म 1 जनवरी 1941 को जयपुर में हुआ था। उन्होंने पुणे के फिल्म एंड टेलीविज़न इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) से अभिनय की शिक्षा ली थी। वे 70 और 80 के दशक में हिंदी सिनेमा के सबसे व्यस्त कलाकारों में से एक रहे।
उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए उनके मुंबई स्थित आवास पर रखा गया है। अंतिम संस्कार कल शिवाजी पार्क श्मशान घाट में किया जाएगा।
श्रद्धांजलि
सचमुच, असरानी जैसे कलाकार बार-बार नहीं आते। उनकी अनुपस्थिति भारतीय सिनेमा के उस सुनहरे अध्याय को अधूरा कर गई है, जिसमें हंसी और मानवीय संवेदनाओं का अद्भुत संतुलन था।
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