ट्रंप के 25% अतिरिक्त टैरिफ की समय-सीमा समाप्ति के करीब, बाजार में गिरावट का दौर जारी

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित अतिरिक्त 25% टैरिफ की समय-सीमा के करीब आने के बीच भारतीय शेयर बाजारों में लगातार दबाव देखा जा रहा है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और व्यापार युद्ध के खतरे ने निवेशकों के मनोबल को प्रभावित किया है, जिसके चलते प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट दर्ज की गई है।

बाजार में गिरावट की वजहें

ट्रंप प्रशासन द्वारा चीन सहित कई देशों से आयातित वस्तुओं पर लगाए गए अतिरिक्त टैरिफ ने वैश्विक व्यापार पर विपरीत प्रभाव डाला है। इस टैरिफ की समय-सीमा के नजदीक आने से निवेशकों में आशंका बढ़ गई है कि टैरिफ बढ़ाने से भारतीय कंपनियों के लिए भी अप्रत्यक्ष तौर पर दबाव बढ़ सकता है। इसके अलावा, वैश्विक आर्थिक वृद्धि की धीमी गति और मुद्रास्फीति की बढ़ती चिंता ने बाजार को कमजोर कर दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अमेरिका-चीन के बीच व्यापारिक तनाव पूर्ण रूप से समाप्त नहीं होता, तब तक निवेशकों की सावधानी बरकरार रहेगी। अतिरिक्त टैरिफ के चलते उत्पादन लागत बढ़ने और आपूर्ति श्रृंखलाओं में बाधाओं के कारण कई सेक्टर्स में लाभप्रदता पर असर पड़ सकता है।

सेंसेक्स-निफ्टी का हाल

हालिया कारोबार के दौरान, सेंसेक्स में लगभग 350 अंकों की गिरावट दर्ज की गई जबकि निफ्टी भी 100 अंकों से अधिक नीचे गया। बैंकिंग, ऑटो, और मेटल सेक्टर के शेयर सबसे अधिक प्रभावित रहे। खासकर आयात निर्भरता वाले सेक्टरों में दबाव देखा गया क्योंकि टैरिफ बढ़ने से उनके लागत में इजाफा हो सकता है।

मिडकैप और स्मॉलकैप सेक्टर में भी बिकवाली का दबाव था, जिससे निवेशकों में जोखिम कम करने की प्रवृत्ति और बढ़ गई। विदेशी निवेशकों ने भी बाजार से निकासी की, जिससे रुपया दबाव में आया और मुद्रा विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव देखा गया।

निवेशकों की रणनीतियाँ

वित्तीय सलाहकारों का कहना है कि इस दौर में निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए और पैनिक सेलिंग से बचना चाहिए। दीर्घकालिक निवेशकों के लिए यह अवसर बाजार के उचित मूल्यांकन के लिए अच्छा समय हो सकता है। वहीं, म्यूचुअल फंड्स और एसआईपी (सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) के जरिए निवेश को जारी रखना समझदारी भरा कदम माना जा रहा है।

विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि जोखिम प्रबंधन के लिए पोर्टफोलियो में विविधता जरूरी है। स्टॉक चुनते समय कंपनी की बुनियादी मजबूती और वित्तीय स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहिए। इसके साथ ही, वैश्विक बाजारों के उतार-चढ़ाव को देखते हुए सतत अपडेट रहना आवश्यक है।

आगे की संभावनाएं

अमेरिका और चीन के बीच आगामी व्यापार वार्ता पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं। यदि दोनों पक्षों के बीच कोई समझौता होता है, तो बाजारों में तेजी आ सकती है। लेकिन अगर टैरिफ में और वृद्धि होती है, तो वैश्विक बाजारों में और गिरावट संभव है। इस स्थिति में भारतीय बाजार भी प्रभावित होंगे।

सरकार और केंद्रीय बैंक (RBI) की नीतियों पर भी नजरें टिकी हैं, क्योंकि वे आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए उपाय कर सकते हैं। निवेशकों को विदेशी मुद्राओं और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव पर भी ध्यान रखना होगा, जो बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं।

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