संभल में मीट कारोबारियों की धरपकड़ जारी, प्रमोद कृष्णम के बयान से बढ़ी हलचल

संभल जिले में मीट कारोबारियों के खिलाफ जारी छापेमारी का सिलसिला लगातार तीसरे दिन भी जारी है। प्रशासन की ओर से इस कार्रवाई में कड़ी मेहनत दिख रही है, वहीं इस मामले में स्थानीय नेता प्रमोद कृष्णम ने एक विवादित बयान दिया है, जिसने राजनीति और प्रशासन दोनों के बीच हलचल बढ़ा दी है।

मीट कारोबारियों पर तीसरे दिन भी छापेमारी

संभल पुलिस प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने संयुक्त रूप से मीट कारोबार के अवैध कारोबार और नियमों के उल्लंघन को लेकर विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी की है। इन छापेमारियों के दौरान कई दुकानों से संदिग्ध सामग्री और कागजात जब्त किए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई उपभोक्ताओं को शुद्ध और सुरक्षित मांस उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की जा रही है।

अधिकारियों ने यह भी बताया कि छापेमारी के दौरान कारोबार में जुड़े कुछ लोगों को नोटिस भी जारी किए गए हैं और मामले की गहनता से जांच की जा रही है।

प्रमोद कृष्णम का विवादित बयान

इस बीच, स्थानीय नेता और पूर्व विधायक प्रमोद कृष्णम ने मीडिया से बातचीत में कहा,

“संभल के मीट कारोबार में जो पैसे घूम रहे हैं, उसका एक हिस्सा सांसद के घर पहुंचता है। यह क्षेत्र की राजनीति का सच है।”

इस बयान ने इलाके में सनसनी मचा दी है। विपक्षी दलों ने इसे राजनीति का बड़ा आरोप बताया है, जबकि कुछ ने इसे जांच का विषय बनाने की मांग की है। स्थानीय प्रशासन ने फिलहाल इस बयान पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन कहा जा रहा है कि यदि कोई पक्ष भ्रष्टाचार या अनियमितताओं में संलिप्त पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद

प्रमोद कृष्णम के इस बयान के बाद संभल में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने इस मामले को लेकर सरकार और सांसद से जवाब मांगा है। वहीं, कुछ समर्थक इसे चुनावी रणनीति का हिस्सा भी बता रहे हैं।

प्रशासन का कहना है कि छापेमारी पूरी तरह से कानून और नियमों के तहत हो रही है, और किसी भी प्रकार की राजनीतिक दबाव से वे नहीं डरेंगे। उन्होंने साफ किया कि भ्रष्टाचार या किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

स्थानीय जनता की प्रतिक्रिया

संभल के स्थानीय निवासी इस मामले को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ लोगों का मानना है कि यह कार्रवाई जरूरी थी क्योंकि मांस कारोबार में कई जगह नियमों का उल्लंघन हो रहा था। वहीं, कुछ लोग राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को लेकर निराशा जता रहे हैं।

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