अक्सर माता-पिता इस चिंता में रहते हैं कि उनके बच्चे के दूध के दांत (Milk Teeth) समय पर क्यों नहीं गिर रहे। सामान्यतः बच्चों के दूध के दांत 6 से 12 वर्ष की उम्र के बीच गिरने लगते हैं और स्थायी दांत आने लगते हैं। लेकिन कुछ बच्चों में यह प्रक्रिया देरी से शुरू होती है, जिससे माता-पिता घबरा जाते हैं।
डेंटल एक्सपर्ट्स के अनुसार, ये पूरी तरह से हर बच्चे की शारीरिक वृद्धि (growth pattern) पर निर्भर करता है। ऐसे मामलों में अधिकतर स्थिति सामान्य होती है, लेकिन कुछ मामलों में डॉक्टरी सलाह लेना जरूरी हो सकता है।
डॉक्टर की राय: कब चिंता की बात है?
डॉ. बताती हैं:
“हर बच्चे की ग्रोथ स्पीड अलग होती है। कुछ बच्चों के दूध के दांत 5 साल में गिरने लगते हैं, जबकि कुछ के 8 साल बाद। यदि बच्चा 13 वर्ष की उम्र तक भी दूध के दांतों के साथ है, तो डेंटल जांच आवश्यक हो जाती है।”
देर से दूध के दांत गिरने के सामान्य कारण:
जेनेटिक फैक्टर: माता-पिता में भी देर से दांत गिरे हों तो बच्चों में भी हो सकता है।
हॉर्मोनल बदलाव: थायरॉयड या ग्रोथ हार्मोन में कमी से दांत देर से गिर सकते हैं।
पोषण की कमी: कैल्शियम, विटामिन D और फॉस्फोरस की कमी दांतों के विकास को प्रभावित कर सकती है।
स्थायी दांतों का देर से बनना: कई बार नए दांत बनने में देरी होती है जिससे पुराने दांत नहीं गिरते।
गंभीर संक्रमण या बीमारी: कुछ बच्चों को बचपन में ऐसी बीमारियां होती हैं जिनसे ग्रोथ धीमी हो सकती है।
क्या करें माता-पिता?
दांत गिरने और स्थायी दांत आने की प्रक्रिया को नियमित तौर पर मॉनिटर करें।
अगर बच्चा 12 साल की उम्र तक भी कई दूध के दांत रखता है, तो डेंटिस्ट से जांच जरूर कराएं।
बच्चों को पौष्टिक आहार दें जिसमें दूध, दही, फल, सब्ज़ियां और मेवे शामिल हों।
फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट और नियमित ब्रशिंग की आदत डालें।
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