भारतीय भोजन में दही का एक विशेष स्थान है। चाहे खाना पचाने की बात हो या गर्मी में ठंडक देने की, दही को सेहत का रक्षक माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जो दही आप हर रोज़ ‘फायदेमंद बैक्टीरिया’ के भरोसे खा रहे हैं, वह वास्तव में आपके शरीर को कोई लाभ नहीं पहुंचा रहा हो?
हाल के वर्षों में बाजार में उपलब्ध कई तरह की पैक्ड दही और फ्रिज में कई दिन रखे गए दही में प्रोबायोटिक बैक्टीरिया की सक्रियता समाप्त हो जाती है। यानी आप सोचते हैं कि आप स्वास्थ्यवर्धक ‘लाइव बैक्टीरिया’ खा रहे हैं, जबकि हकीकत में आप केवल ‘मरे हुए बैक्टीरिया’ वाला दही खा रहे होते हैं – जो शरीर को कोई लाभ नहीं पहुंचाता।
दही का असली फायदा क्या होता है?
दही को स्वास्थ्य के लिए लाभकारी इसलिए माना जाता है क्योंकि इसमें मौजूद लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया (LAB) हमारी आंतों की सेहत सुधारते हैं। ये बैक्टीरिया:
पाचन में मदद करते हैं
पेट की गैस और अपच को कम करते हैं
रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं
आंतों की खराबी से बचाते हैं
लेकिन ये सभी फायदे तभी मिलते हैं जब दही में ‘लाइव’ यानी जीवित बैक्टीरिया मौजूद हों।
फ्रिज में रखा दही बन सकता है बेअसर
कई लोग दही को 4-5 दिन तक फ्रिज में रखते हैं और मानते हैं कि यह अब भी ताजा है। लेकिन वास्तव में, लंबे समय तक ठंडे तापमान में रखने या बार-बार तापमान में उतार-चढ़ाव होने से दही में मौजूद फायदेमंद बैक्टीरिया निष्क्रिय या मर सकते हैं।
इसी तरह, बाजार में मिलने वाली कुछ पैक्ड दही या फ्लेवर्ड योगर्ट में भी प्रोबायोटिक्स की संख्या बहुत कम होती है या वे निष्क्रिय होते हैं। इसका मतलब यह हुआ कि आप केवल “दही जैसा पदार्थ” खा रहे हैं, असली पोषण नहीं।
कैसे पहचानें असली, फायदेमंद दही?
घर पर जमाया गया ताजा दही सबसे अच्छा होता है।
दही का स्वाद हल्का खट्टा होना चाहिए — ज्यादा खट्टा या फीका दही शक के घेरे में हो सकता है।
अच्छी गुणवत्ता वाले प्रोबायोटिक दही पर “Live & Active Cultures” लिखा होता है।
पैक्ड दही का शेल्फ लाइफ जितना लंबा होगा, बैक्टीरिया उतने कम जीवित होंगे।
कब सावधान हो जाएं?
अगर दही पानी छोड़ने लगे या बदबू देने लगे
बहुत ज्यादा खट्टा हो जाए
दही बहुत गाढ़ा या बहुत पतला लगे
तो यह संकेत हो सकते हैं कि दही में बैक्टीरिया मर चुके हैं।
क्या करें?
रोज़ ताज़ा दही घर पर ही जमाएं।
दही को 24 घंटे से अधिक न रखें।
गर्मियों में दही को ठंडी जगह रखें, लेकिन बहुत ज्यादा ठंड में भी न रखें।
बाजार से प्रोबायोटिक दही खरीदते समय लेबल ज़रूर पढ़ें।
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