क्या दालें बन रही हैं पेट दर्द और गैस की वजह? जानिए विशेषज्ञों की राय

भारतीय रसोई में दालें एक अहम स्थान रखती हैं। प्रोटीन से भरपूर और पौष्टिक मानी जाने वाली दालें अक्सर हर घर के भोजन का अनिवार्य हिस्सा होती हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि कुछ लोगों में दालों का सेवन पेट दर्द, गैस या ब्लोटिंग (पेट फूलने) की वजह बन सकता है?

पाचन तंत्र से जुड़ी समस्याओं पर काम करने वाले पोषण विशेषज्ञों का मानना है कि दालें भले ही स्वास्थ्यवर्धक हों, लेकिन कुछ विशेष कारणों से ये लोगों को पचने में दिक्कत दे सकती हैं। आइए जानें कि ऐसा क्यों होता है और इससे बचाव कैसे किया जा सकता है।

दालों में छिपा है FODMAPs का रहस्य

विशेषज्ञों के अनुसार, कई दालों में FODMAPs (Fermentable Oligosaccharides, Disaccharides, Monosaccharides And Polyols) नामक तत्व पाए जाते हैं। यह एक प्रकार का कार्बोहाइड्रेट होता है, जो छोटी आंत में आसानी से नहीं पचता।

जब यह बड़ी आंत तक पहुँचता है, तो वहाँ मौजूद बैक्टीरिया इन्हें किण्वित (ferment) करने लगते हैं, जिससे गैस बनती है और पेट फूलने लगता है। यही कारण है कि कुछ लोगों को दालें खाने के बाद पेट में भारीपन, दर्द या अत्यधिक गैस की शिकायत हो सकती है।

हर दाल नहीं होती समान

विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि हर दाल की प्रकृति अलग होती है। मसलन:

राजमा, चना दाल, मटर और मसूर दाल में FODMAPs की मात्रा अपेक्षाकृत अधिक होती है।

मूंग दाल और तूअर दाल अपेक्षाकृत हल्की और जल्दी पचने वाली मानी जाती हैं।

इसलिए यदि आपको पेट फूलने की समस्या रहती है, तो दालों का चुनाव सोच-समझकर करना चाहिए।

इन कारणों से भी हो सकती है परेशानी:

दाल को ठीक से न भिगोना: दालों को बिना भिगोए पकाने से उनमें मौजूद गैस उत्पन्न करने वाले तत्व सक्रिय रह जाते हैं।

अधिक मात्रा में सेवन: ज्यादा दाल खाने से पाचन प्रणाली पर दबाव पड़ता है, जिससे पेट की गड़बड़ी हो सकती है।

अन्य पाचन समस्याएं: यदि किसी व्यक्ति को IBS (Irritable Bowel Syndrome) या लैक्टोज इन्टॉलरेंस जैसी समस्या हो, तो दालें समस्या को बढ़ा सकती हैं।

कम फाइबर सहिष्णुता: कुछ लोगों की आंतें अधिक फाइबर नहीं झेल पातीं, जिससे सूजन या असहजता होती है।

बचाव के उपाय: कैसे खाएँ दालें बिना पेट खराब किए?

भिगोकर पकाएँ: दाल को कम से कम 6–8 घंटे भिगोकर रखने से उसमें मौजूद FODMAPs की मात्रा कम हो सकती है।

पानी बदलें: भिगोने का पानी फेंक कर ताज़ा पानी में दाल पकाएँ।

हींग और अदरक का उपयोग करें: ये मसाले पाचन को बेहतर बनाते हैं और गैस की समस्या कम करते हैं।

छोटी मात्रा से शुरुआत करें: यदि किसी दाल से पेट में दिक्कत होती है, तो पहले कम मात्रा में सेवन करें और धीरे-धीरे शरीर की प्रतिक्रिया देखें।

विशेषज्ञों की राय:

डॉ. क्लिनिकल न्यूट्रिशनिस्ट, कहती हैं:
“दालें बेहद उपयोगी खाद्य पदार्थ हैं, लेकिन हर शरीर की पाचन क्षमता अलग होती है। यदि किसी को लगातार गैस, दर्द या ब्लोटिंग की समस्या हो रही है, तो बेहतर है कि वह अपने खानपान का निरीक्षण करे और ज़रूरत पड़े तो डाइटीशियन से संपर्क करे।”

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