आधुनिक जीवनशैली में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है। शहरी क्षेत्रों में प्रदूषण और धूल-मिट्टी से बचने के लिए लोग इसे अपने घरों और ऑफिस में रख रहे हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि गलत तरीके से या समय पर मेंटेनेंस न होने पर एयर प्यूरीफायर स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है, खासकर फेफड़ों के लिए।
डॉक्टरों की चेतावनी
डॉक्टरों का कहना है कि एयर प्यूरीफायर अगर पुराना, गंदा या सही तरीके से फंक्शन न कर रहा हो, तो यह धूल, बैक्टीरिया और वायरस को हवा में फैलाने का कारण बन सकता है। इसके अलावा, कुछ एयर प्यूरीफायर में ओजोन जनरेटिंग फीचर होता है, जो लंबे समय तक श्वसन तंत्र को नुकसान पहुंचा सकता है।
किन लोगों के लिए ज्यादा खतरा
बच्चे और बुजुर्ग
छोटे बच्चों और बुजुर्गों की इम्यूनिटी कमजोर होती है। गंदा या खराब एयर प्यूरीफायर इनके फेफड़ों और सांस लेने की क्षमता पर प्रतिकूल असर डाल सकता है।
दमा और एलर्जी के मरीज
ऐसे मरीज जो पहले से ही सांस से संबंधित समस्याओं से जूझ रहे हैं, उनके लिए गंदा एयर प्यूरीफायर गंभीर परेशानी पैदा कर सकता है।
पुराने या खराब फिल्टर वाले प्यूरीफायर
अगर फिल्टर समय पर बदले नहीं गए हैं या मशीन में से धूल और कण बाहर निकल रहे हैं, तो यह हानिकारक हो सकता है।
एयर प्यूरीफायर इस्तेमाल करते समय ध्यान रखने योग्य बातें
फिल्टर को समय पर बदलें
एयर प्यूरीफायर के फिल्टर को निर्माता द्वारा बताए गए अंतराल पर बदलें। यह सबसे महत्वपूर्ण कदम है।
सफाई का ध्यान रखें
मशीन की नियमित सफाई करें और पानी या नमी वाले हिस्सों में फंगस न लगने दें।
ओजोन जनरेटिंग प्यूरीफायर से बचें
ओजोन जनरेटिंग एयर प्यूरीफायर लंबे समय तक फेफड़ों के लिए हानिकारक हो सकता है। केवल HEPA या एक्टिव कार्बन फिल्टर वाले मॉडल चुनें।
कमरे की वेंटिलेशन बनाए रखें
प्यूरीफायर के साथ-साथ कमरे में हल्की वेंटिलेशन भी जरूरी है। पूरी तरह बंद कमरे में प्यूरीफायर का लगातार इस्तेमाल हानिकारक हो सकता है।
सही जगह पर रखें
एयर प्यूरीफायर को फर्श पर सीधे न रखें। इसे कमरे के बीच या ऊंचाई पर रखें, ताकि हवा पूरी तरह से सर्कुलेट हो।
यह भी पढ़ें:
Navyug Sandesh Hindi Newspaper, Latest News, Findings & Fact Check