आजकल की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में लोग सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी टूटते जा रहे हैं। काम का बोझ, प्रतिस्पर्धा, असफलता का डर और भविष्य की चिंता — ये सब धीरे-धीरे मेंटल हेल्थ को कमजोर कर रहे हैं। नतीजा? एंजाइटी (चिंता) और पैनिक अटैक (घबराहट का दौरा) जैसी मानसिक समस्याएं आम हो गई हैं।
हालाँकि लोग इन दोनों को एक जैसा समझते हैं, लेकिन एंजाइटी और पैनिक अटैक एक-दूसरे से बहुत अलग हैं। आइए जानते हैं इन दोनों में क्या अंतर है।
🤯 क्या होता है एंजाइटी अटैक?
एंजाइटी यानी अत्यधिक चिंता का भाव। जब चिंता बहुत ज़्यादा बढ़ जाती है और दिमाग उस दबाव को झेल नहीं पाता, तब होता है एंजाइटी अटैक। यह धीरे-धीरे आता है और किसी भावनात्मक या मानसिक चोट के कारण ट्रिगर होता है।
👉 एंजाइटी अटैक के लक्षण:
सांस लेने में तकलीफ
दिल की धड़कन तेज़ होना
हाथ-पैर कांपना
पसीना आना
बार-बार डर लगना या बेचैनी
😨 क्या होता है पैनिक अटैक?
पैनिक अटैक अचानक और तीव्र रूप से आता है। यह बिना किसी चेतावनी के कहीं भी हो सकता है — घर, बाजार, ट्रेन में या किसी शांत माहौल में भी। इसे अक्सर कोई डर या फोबिया ट्रिगर करता है।
👉 पैनिक अटैक के लक्षण:
तेज़ धड़कन और सांस फूलना
उल्टी जैसा महसूस होना
ब्लड प्रेशर का बढ़ना
बहुत ज़्यादा पसीना
ऐसा डर मानो जान निकल जाएगी
⚖️ एंजाइटी और पैनिक अटैक में क्या है फर्क?
पॉइंट एंजाइटी अटैक पैनिक अटैक
शुरुआत धीरे-धीरे होती है अचानक आता है
कारण चिंता, तनाव, ट्रॉमा फोबिया या अज्ञात डर
स्थान किसी विशेष स्थिति में कहीं भी, कभी भी
लक्षण हल्के से मध्यम बहुत तीव्र और डरावने
समय थोड़ी देर तक रहता है 10-15 मिनट में चरम पर
🧘 दोनों से निपटने के उपाय:
गहरी सांस लें और ध्यान करें
खुद को शांत करने की कोशिश करें
अगर लक्षण बार-बार दिखें तो डॉक्टर या काउंसलर से मिलें
हेल्दी डाइट लें और नींद पूरी करें
अपनी भावनाओं को शेयर करें, अकेले न रहें
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