आज के समय में स्मार्टफोन हमारी ज़िंदगी का सबसे अहम हिस्सा बन चुका है। बैंकिंग से लेकर सोशल मीडिया, ऑफिस के काम से लेकर निजी तस्वीरों तक—सब कुछ एक ही डिवाइस में मौजूद होता है। ऐसे में अगर एंड्रॉयड स्मार्टफोन की सुरक्षा में जरा-सी भी चूक हो जाए, तो साइबर ठगी और डेटा चोरी का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि अच्छी खबर यह है कि एक छोटा-सा जरूरी कदम उठाकर आपका एंड्रॉयड फोन काफी हद तक सुरक्षित बनाया जा सकता है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, एंड्रॉयड यूज़र्स को सबसे पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके फोन में लेटेस्ट सॉफ्टवेयर अपडेट इंस्टॉल हो। कंपनियां समय-समय पर सिक्योरिटी पैच जारी करती हैं, जो नए वायरस, मैलवेयर और हैकिंग तकनीकों से फोन को बचाते हैं। इसके बावजूद कई यूज़र महीनों तक अपडेट को नजरअंदाज करते रहते हैं, जो खतरे को बढ़ा देता है।
दूसरा अहम कदम है Google Play Protect को एक्टिव रखना। यह फीचर फोन में इंस्टॉल ऐप्स को स्कैन करता है और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी देता है। विशेषज्ञों का कहना है कि थर्ड-पार्टी ऐप स्टोर से ऐप डाउनलोड करने से बचना चाहिए, क्योंकि ऐसे ऐप्स में मालवेयर होने की संभावना अधिक होती है।
फोन की सुरक्षा के लिए स्क्रीन लॉक सिस्टम भी बेहद जरूरी है। पैटर्न या साधारण पिन की जगह फिंगरप्रिंट या फेस लॉक जैसे मजबूत विकल्पों का इस्तेमाल करना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है। इसके अलावा, लॉक स्क्रीन पर नोटिफिकेशन में संवेदनशील जानकारी दिखने से रोकना भी एक समझदारी भरा कदम है।
एक और जरूरी सेटिंग है ऐप परमिशन मैनेजमेंट। कई ऐप्स जरूरत से ज्यादा एक्सेस मांगते हैं, जैसे कॉन्टैक्ट्स, कैमरा या लोकेशन। ऐसे में यूज़र्स को समय-समय पर यह जांचते रहना चाहिए कि कौन-सा ऐप किस जानकारी तक पहुंच रखता है।
इसके साथ ही, “Find My Device” फीचर को ऑन रखना भी बेहद उपयोगी है। फोन गुम या चोरी हो जाने की स्थिति में इससे डिवाइस को लॉक किया जा सकता है या डेटा को रिमोटली डिलीट किया जा सकता है।
साइबर एक्सपर्ट्स यह भी सलाह देते हैं कि सार्वजनिक Wi-Fi का इस्तेमाल करते समय सावधानी बरती जाए और बैंकिंग या संवेदनशील काम ऐसे नेटवर्क पर न किए जाएं।
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