इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के खिलाफ फर्जी डिग्री मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग को खारिज कर दिया है। यह याचिका दिवाकर नाथ त्रिपाठी द्वारा दाखिल की गई थी, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि मौर्य ने चुनाव लड़ने और पेट्रोल पंप का आवंटन कराने के लिए अमान्य शैक्षणिक डिग्री का उपयोग किया है।
याचिकाकर्ता ने यह दावा किया था कि उपमुख्यमंत्री ने जिस डिग्री का उल्लेख किया है, वह मान्यता प्राप्त संस्थान से नहीं है और उसे लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया था। हालांकि, हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिका में लगाए गए आरोपों के समर्थन में कोई ठोस या विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया। कोर्ट ने यह भी कहा कि केवल संदेह या अनुमान के आधार पर किसी के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही नहीं चलाई जा सकती।
इससे पहले, प्रयागराज की जिला अदालत ने भी इसी मामले में याचिका को खारिज कर दिया था। हाई कोर्ट के इस निर्णय को केशव प्रसाद मौर्य के लिए एक बड़ी कानूनी राहत माना जा रहा है, क्योंकि यह मामला राजनीतिक रूप से संवेदनशील था और इससे उनकी छवि पर प्रभाव पड़ सकता था। कोर्ट के फैसले से साफ हो गया है कि बिना पुख्ता सबूतों के केवल आरोपों के आधार पर आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया जा सकता।
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