थायराइड ग्रंथि की गड़बड़ी आज एक आम समस्या बन चुकी है। यह बीमारी महिलाओं में ज़्यादा पाई जाती है और थकान, वजन बढ़ना, मूड स्विंग्स, बाल झड़ना और त्वचा की समस्याओं जैसी परेशानियां पैदा करती है। थायराइड को नियंत्रित करने में सही खानपान, योग और आयुर्वेदिक उपाय अहम भूमिका निभा सकते हैं।
किन चीज़ों से करें परहेज?
- सोया और सोया उत्पाद – इसमें गोइट्रोजेन्स होते हैं, जो थायराइड हार्मोन के उत्पादन में बाधा डालते हैं।
- क्रूसीफेरस सब्जियां – पत्ता गोभी, फूल गोभी, ब्रोकोली और शलजम जैसी सब्जियां कच्ची खाने से थायराइड की समस्या बढ़ सकती है।
- ज्यादा प्रोसेस्ड और जंक फूड – इनमें मौजूद प्रिज़र्वेटिव्स और अस्वस्थ फैट थायराइड हार्मोन को प्रभावित कर सकते हैं।
- कैफीन और कार्बोनेटेड ड्रिंक्स – ये थायराइड दवाओं के असर को कम कर सकते हैं।
- अत्यधिक चीनी और मैदा – मोटापा और हार्मोनल असंतुलन बढ़ाते हैं, जिससे थायराइड कंट्रोल करना मुश्किल होता है।
आयुर्वेदिक उपाय
- अश्वगंधा: थायराइड ग्रंथि को सक्रिय करने में सहायक मानी जाती है।
- गुग्गुल: इसमें मौजूद तत्व मेटाबॉलिज़्म को तेज करते हैं और हार्मोन संतुलन में मदद करते हैं।
- त्रिफला: पाचन और डिटॉक्स में सहायक, जिससे थायराइड बेहतर तरीके से नियंत्रित होता है।
- ध्यान और प्राणायाम: आयुर्वेद और योग में इन्हें तनाव कम करने और हार्मोनल बैलेंस बनाए रखने के लिए ज़रूरी माना गया है।
योगिक उपाय
- सर्वांगासन: थायराइड ग्रंथि को उत्तेजित कर हार्मोन संतुलन बनाए रखता है।
- मत्य्स्यासन: थायराइड और पैराथायराइड ग्रंथि को सक्रिय करता है।
- भुजंगासन: गले और थायराइड क्षेत्र में रक्त संचार को बढ़ाता है।
- अनुलोम-विलोम और उज्जायी प्राणायाम: हार्मोनल बैलेंस और तनाव कम करने में बेहद फायदेमंद।
थायराइड मरीजों को अपनी डाइट और दिनचर्या में छोटे-छोटे बदलाव करने की ज़रूरत है। दवाइयों के साथ अगर योग और आयुर्वेदिक उपाय अपनाए जाएं, तो बेहतर और लंबे समय तक सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं।
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