शहरों में वायु प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह केवल सांस की बीमारी तक सीमित नहीं है। प्रदूषित हवा में मौजूद PM 2.5 पार्टिकल्स हृदय और मस्तिष्क को भी प्रभावित कर सकते हैं। शोध बताते हैं कि PM 2.5 से सीधे दिल की धड़कन और रक्त वाहिकाओं पर असर पड़ता है, जिससे हार्ट अटैक, स्ट्रोक और यहां तक कि कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
PM 2.5 क्या है और क्यों है खतरनाक?
PM 2.5 वे अत्यंत सूक्ष्म कण होते हैं जिनका व्यास 2.5 माइक्रोमीटर से भी कम होता है।
ये कण नाक और गले से सीधे फेफड़ों में प्रवेश कर सकते हैं, वहां से रक्त प्रवाह में मिलकर हृदय और मस्तिष्क तक पहुंच जाते हैं।
लगातार PM 2.5 के संपर्क में रहने से आर्टरीज में सूजन, ब्लड प्रेशर बढ़ना और कोलेस्ट्रॉल का असंतुलन जैसी समस्याएं सामने आती हैं।
स्ट्रोक और हार्ट अटैक का बढ़ता खतरा
वायु प्रदूषण के कारण रक्त में सक्रिय ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ता है, जो हार्ट अटैक और स्ट्रोक के लिए जिम्मेदार है।
शोध से पता चला है कि जो लोग 10 साल से अधिक समय तक प्रदूषित शहरों में रहते हैं, उनमें हृदय संबंधी बीमारियों का जोखिम 20-30% तक बढ़ जाता है।
PM 2.5 सीधे रक्त वाहिकाओं की दीवारों को नुकसान पहुंचाकर ब्लॉकेज का खतरा बढ़ाता है।
कैंसर का भी बढ़ता खतरा
प्रदूषित हवा में कार्सिनोजेनिक (कैंसर पैदा करने वाले) तत्व भी मौजूद होते हैं।
लंबे समय तक इनके संपर्क में रहने से फेफड़े और अन्य अंगों में कैंसर विकसित होने का खतरा बढ़ता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने PM 2.5 को ग्रुप 1 कार्सिनोजेनिक घोषित किया है।
सुरक्षित रहने के उपाय
एयर प्यूरीफायर का उपयोग करें – घर और ऑफिस में हवा साफ रखने के लिए।
मास्क पहनें – बाहर निकलते समय N95 या N99 मास्क का इस्तेमाल करें।
बाहर की गतिविधि सीमित करें – विशेषकर प्रदूषित दिनों में।
स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं – हृदय और फेफड़ों को मजबूत रखने के लिए संतुलित आहार और व्यायाम करें।
हवा की गुणवत्ता पर नजर रखें – मोबाइल ऐप या सरकारी पोर्टल से AQI (Air Quality Index) की जानकारी लें।
विशेषज्ञों की सलाह
डॉक्टरों का कहना है कि वायु प्रदूषण को नजरअंदाज करना अब महंगा पड़ सकता है।
उच्च जोखिम वाले लोग – जैसे बुजुर्ग, हृदय रोगी और बच्चों – खास सतर्क रहें।
समय-समय पर हृदय और फेफड़ों की जांच कराना जरूरी है।
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