आज के दौर में सुरक्षा की खातिर हर घर, दफ्तर, दुकान और सोसायटी में CCTV कैमरे लगाना आम बात हो गई है। लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि जो कैमरा आपको सुरक्षा देने के लिए लगाया गया है, वही आपकी निजी जिंदगी में सेंध भी लगा सकता है? हाल ही में साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि देश में बढ़ते स्मार्ट कैमरों के इस्तेमाल के साथ-साथ ‘कैमरा हैकिंग’ की घटनाएं भी तेजी से बढ़ रही हैं।
कैसे होता है कैमरा हैक?
साइबर अपराधी इंटरनेट से जुड़े CCTV कैमरों को निशाना बनाकर उनमें मौजूद लाइव फुटेज तक पहुंच बना लेते हैं। कई बार कैमरे की डिफॉल्ट आईडी और पासवर्ड नहीं बदले जाते, जिससे हैकर्स के लिए सिस्टम में घुसना आसान हो जाता है। एक बार अंदर पहुंचने के बाद, वे न केवल लाइव वीडियो देख सकते हैं, बल्कि पुराने रिकॉर्डिंग डाउनलोड कर सकते हैं, कैमरा का ऐंगल बदल सकते हैं और यहां तक कि माइक्रोफोन से आपकी आवाज़ तक सुन सकते हैं।
घर की निजता पर खतरा
कई मामलों में यह देखा गया है कि हैक हुए कैमरों से ली गई निजी वीडियो या तस्वीरें डार्क वेब पर बेची जाती हैं। साइबर एक्सपर्ट नितिन अग्रवाल बताते हैं, “अक्सर लोग यह सोचते हैं कि घर का कैमरा तो ‘लोकल’ है, लेकिन अगर वह इंटरनेट से जुड़ा है, तो हैकर्स के लिए आपके लिविंग रूम तक पहुंच बनाना मुश्किल नहीं है।”
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में ऐसे हजारों IP कैमरे हैं जिनकी सेटिंग्स इतनी कमजोर हैं कि कोई भी उन्हें ब्राउज़र से एक्सेस कर सकता है। कई वेबसाइटें तो खुलेआम “ओपन कैमरा फीड” दिखाती हैं — जिनमें घरों, दुकानों और ऑफिस के दृश्य तक शामिल होते हैं।
कैसे बचें इस डिजिटल जासूसी से
साइबर सुरक्षा एजेंसियों और विशेषज्ञों ने CCTV यूज़र्स के लिए कुछ अहम सावधानियां बताई हैं —
डिफॉल्ट पासवर्ड तुरंत बदलें।
हर कैमरा इंस्टॉल करते ही उसका यूज़रनेम और पासवर्ड अपने हिसाब से बदलें।
राउटर और नेटवर्क सुरक्षित रखें।
कमजोर Wi-Fi पासवर्ड हैकिंग का सबसे बड़ा कारण होता है। WPA2 या WPA3 सुरक्षा प्रोटोकॉल का उपयोग करें।
फर्मवेयर अपडेट करें।
कैमरा कंपनियां समय-समय पर सिक्योरिटी अपडेट जारी करती हैं। इन्हें नजरअंदाज न करें।
क्लाउड एक्सेस सीमित करें।
अगर ज़रूरी न हो, तो कैमरे की क्लाउड रिकॉर्डिंग सुविधा बंद रखें।
मोबाइल ऐप की अनुमति जांचें।
अनजान ऐप्स या थर्ड पार्टी एक्सेस को रोकें।
सरकार और उपभोक्ता दोनों को सजग रहना होगा
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि देश में निगरानी उपकरणों की बिक्री तो तेज़ी से बढ़ रही है, लेकिन इनके इस्तेमाल के सुरक्षा मानक अब भी कमजोर हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं को स्वयं सतर्क रहना होगा। अगर कैमरा संदिग्ध तरीके से चालू-बंद हो रहा है, अनजाने नोटिफिकेशन आ रहे हैं, या डेटा अचानक खत्म हो रहा है — तो समझिए कोई आपकी जासूसी कर रहा है।
यह भी पढ़ें:
लाठियों की बरसात के बीच भी बिहार के युवाओं ने नहीं छोड़ा संघर्ष, राहुल बोले- बदलाव जरूर आएगा
Navyug Sandesh Hindi Newspaper, Latest News, Findings & Fact Check