आज के दौर में हर घर में स्मार्टफोन तो आ गया, लेकिन बुजुर्ग माता-पिता के लिए वह टचस्क्रीन, छोटे आइकॉन और अनगिनत नोटिफिकेशन का जाल बन जाता है। कॉल करना, मैसेज पढ़ना या कैमरा खोलना भी मुश्किल लगता है। लेकिन अब एक साधारण सी ट्रिक से आप अपने महंगे एंड्रॉयड स्मार्टफोन को 2005 वाले नोकिया 1100 जैसा सरल फीचर फोन बना सकते हैं – बिना कोई थर्ड-पार्टी ऐप डाउनलोड किए, बिना फोन रूट किए और बिना डेटा खोए। यह तरीका इतना आसान है कि 70-80 साल के बुजुर्ग भी 2 मिनट में सीख लेंगे।
इस जादुई बदलाव का राज छिपा है गूगल के अपने ‘एंड्रॉयड एक्सेसिबिलिटी फीचर्स’ में। खास तौर पर दो टूल्स – “सिम्पल लॉन्चर” और “एक्सेसिबिलिटी मेन्यू” मिलकर फोन को पूरी तरह बेसिक बना देते हैं। सबसे खास बात यह है कि यह सुविधा एंड्रॉयड 8.0 से लेकर लेटेस्ट एंड्रॉयड 15 तक हर फोन में मुफ्त उपलब्ध है – चाहे सैमसंग हो, शाओमी, रियलमी, वीवो या वनप्लस।
सिर्फ 6 स्टेप में फोन बन जाएगा ‘बुजुर्ग फ्रेंडली’
सेटिंग्स → Accessibility → Installed apps में जाएं।
“Select to Speak” और “Accessibility Menu” को ऑन करें।
अब कोई भी फ्री “Simple Launcher for Seniors” (जैसे Big Launcher, Senior Safety Phone, Wiser आदि) प्ले स्टोर से इंस्टॉल करें। ये ऐप्स आधिकारिक और 4.5+ रेटिंग वाले हैं।
इंस्टॉल करते ही ऐप आपको पूछेगा – “Do you want to set this as default home?” हाँ कर दें।
बस हो गया! अब फोन खोलते ही स्क्रीन पर सिर्फ 6-8 बड़े-बड़े बटन दिखेंगे – कॉल, मैसेज, कैमरा, गैलरी, SOS, कॉन्टैक्ट्स, टॉर्च और बैक।
हर आइकन इतना बड़ा होगा कि बिना चश्मे के भी दिखे। फॉन्ट साइज अपने आप 200% हो जाएगा, नोटिफिकेशन बंद हो जाएंगे, स्वाइप करने की जरूरत खत्म।
अतिरिक्त सुरक्षा फीचर्स जो जान बचाते हैं
SOS बटन: एक टच में 3 चुनिंदा नंबरों पर कॉल + SMS (“मुझे मदद चाहिए”) चला जाता है।
लोकेशन शेयर: SOS दबाने पर लाइव लोकेशन भी भेजता है।
दवाई रिमाइंडर: सुबह-शाम अलार्म के साथ दवा का नाम और फोटो दिखाता है।
रिमोट कंट्रोल: बच्चे अपने फोन से माता-पिता के फोन को लॉक/अनलॉक, वॉल्यूम बढ़ा या लोकेशन ट्रैक कर सकते हैं।
परीक्षण में देखा गया कि 75 साल से ऊपर के 87% बुजुर्गों ने 10 मिनट में ही इस मोड में कॉल करना, फोटो खींचना और मैसेज पढ़ना सीख लिया। पहले जहां वे गलती से गैलरी की जगह कोई ऐप खोल देते थे, अब गलती की गुंजाइश ही नहीं रहती।
कीमत? बिल्कुल जीरो!
हाँ, यह पूरा बदलाव बिना एक रुपया खर्च किए हो जाता है। ज्यादातर अच्छे लॉन्चर फ्री वर्जन में ही सारी जरूरी सुविधाएं देते हैं। प्रीमियम लेना हो तो सालाना सिर्फ 200-300 रुपये में विज्ञापन हट जाते हैं।
दिल्ली के नेहरू नगर में रहने वाले 82 वर्षीय रिटायर्ड कर्नल ओमप्रकाश शर्मा बताते हैं, “पहले पोते ने नया फोन दिया था, पर मैं डरता था छूने से भी। अब सिर्फ 6 बटन हैं – जैसे पुराना नोकिया था। अब रोज बेटे-बेटी से वीडियो कॉल करता हूँ, बिना किसी की मदद के।”
देश में 60 साल से ऊपर की आबादी 15 करोड़ के पार हो चुकी है। ज्यादातर घरों में बच्चे बुजुर्गों को पुराना कीपैड फोन देने से हिचकते हैं क्योंकि उसमें वीडियो कॉल, UPI या दवा की फोटो नहीं भेजी जा सकती। अब यह तरीका दोनों दुनिया का सबसे अच्छा मेल है – स्मार्टफोन की ताकत, फीचर फोन की सादगी।
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