जब धर्मेंद्र और हेमा मालिनी ने पहली बार पर्दे पर साथ काम किया था, शायद उन्होंने नहीं सोचा था कि यह केवल एक फिल्म का जोड़ी नहीं बल्कि जीवन-साथ का प्रतीक बन जाएगा। यह कहानी है प्यार, चुनौतियों और टिकाव की — लगभग ५० वर्षों के सफर की।
दोनों की पहली मुलाक़ात १९७० में फ़िल्म तू हसीन मैं जवान के सेट पर हुई थी, जहाँ धर्मेंद्र-जी और हेमा-जी ने लीड किरदार निभाए।उस पहली झलक में ही उनके बीच कुछ खास जुड़ाव हुआ। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, हेमा मालिनी ने कहा था कि “जिस मिनट मैंने धर्मेंद्र को देखा, मुझे पता था कि यही वह इंसान है जो मेरे साथ आगे रहेगा।”
इसके बाद उन्होंने कई हिट फिल्में दीं—जिनमें शोले भी शामिल है—और इस दौरान उनका रिश्ता पनपा।परंतु इस प्रेम कहानी के सामने बड़ी सामाजिक चुनौतियाँ भी थीं। धर्मेंद्र पहले से ही शादीशुदा थे, उनकी पहली पत्नी थीं प्रकाश कौर, जिनसे उनका परिवार था।
काफी विचार-विमर्श और समय के बाद, दोनों ने 2 मई 1980 को विवाह किया।वर्ष 2025 में उन्होंने अपनी शादी की ४५वीं सालगिरह मनाई।इस लंबे सफर में उन्होंने न सिर्फ एक-दूसरे का सहयोग किया बल्कि सार्वजनिक जीवन, निजी चुनौतियों और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाकर रखा।
हेमा मालिनी ने कहा है कि धर्मेंद्र-जी का आकर्षण सिर्फ उनकी शख्सियत में था—उनमें एक सरल, मानवीय और भावुक इंसान की झलक थी।वहीं धर्मेंद्र ने यह माना कि हेमा ने अभिनय-और-जीवन दोनों में गरिमा और संयम का परिचय दिया है।
रिश्ते की इस गहराई के बावजूद, उन्होंने पारंपरिक परिवार-ढाँचे से हटकर अपना मार्ग चुना। दोनों की शादी और जीवनशैली को लेकर आलोचनाएँ भी हुई थीं—लेकिन उन्होंने तय किया कि वे अपनी जगह-अपनी भूमिका में सम्मान-और-समझदारी से आगे बढ़ेंगे।
आज, इस युगल के दो पुत्रियाँ हैं—ईशा देओल और अहाना देओल—जिन्होंने अपने-अपने रास्ते चुने हैं। उनके माध्यम से यह बात साफ है: यह सिर्फ स्टार-जोड़ी नहीं, बल्कि एक परिवार-रिश्ते-विचारधारा का प्रतीक है।
समय बदला, फिल्म-दुनिया बदली, समाज की सोच बदली — मगर उनका साथ बना रहा। यही उनकी कहानी को विशिष्ट बनाती है। पर्दे के पीछे-इस पार उस ग्लैमर-छवि से परे भी, यह रिश्ता आज भी स्थिर, सम्मानित और प्रेरणादायक है।
इसलिए जब हम कहते हैं कि धर्मेंद्र-हेमा का रिश्ता – “कितने साल का है?”, तो उत्तर है: लगभग ४५ साल विवाह में, और प्यार-परिचय से लेकर आज तक लगभग ५५ साल का जुड़ाव। यानी प्रेम-यात्रा और सार्वजनिक साझेदारी दोनों मिलाकर एक लंबा-चौड़ा सफर है।
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