हर दिन एक कटोरी दही और कैंसर से रहें कोसों दूर: नई स्टडी में बड़ा दावा

भारतीय रसोई में सदियों से शामिल रही दही अब आधुनिक विज्ञान की कसौटी पर भी खरी उतरती दिख रही है। हाल ही में प्रकाशित एक वैज्ञानिक शोध में दावा किया गया है कि रोजाना एक कटोरी दही का सेवन करने से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का खतरा कम किया जा सकता है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुए इस शोध में दही के नियमित सेवन और शरीर में पाए जाने वाले “गट माइक्रोबायोम” के बीच संबंध की पड़ताल की गई। शोध के अनुसार, दही में पाए जाने वाले प्रोबायोटिक्स न केवल पाचन तंत्र को दुरुस्त रखते हैं, बल्कि शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाते हैं, जिससे कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ने की ताकत मिलती है।

क्या कहती है नई स्टडी?

यह अध्ययन अमेरिका के एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय द्वारा किया गया, जिसमें हजारों लोगों की खानपान की आदतों और उनके स्वास्थ्य पर लंबे समय तक निगरानी रखी गई।

शोधकर्ताओं ने पाया कि जो लोग नियमित रूप से दही का सेवन करते हैं, उनके शरीर में कैंसर से लड़ने वाले लाभदायक बैक्टीरिया की मात्रा अधिक होती है। यह विशेष रूप से कोलन (आंतों) कैंसर के जोखिम को कम करने में सहायक पाया गया।

दही में क्या है खास?

दही में पाए जाने वाले प्रोबायोटिक्स, यानी ‘अच्छे बैक्टीरिया’, शरीर के गट हेल्थ को मजबूत बनाते हैं। इसके साथ ही दही कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन B12 और राइबोफ्लेविन जैसे पोषक तत्वों से भरपूर होता है, जो कोशिकाओं की मरम्मत करने में सहायक होते हैं।

दही के अन्य फायदे:

पाचन क्रिया में सुधार

इम्यून सिस्टम को मजबूत करना

शरीर में सूजन को कम करना

पेट की बीमारियों से सुरक्षा

कब और कैसे खाएं दही?

सुबह या दोपहर के भोजन के साथ: एक कटोरी ताजा दही सबसे फायदेमंद मानी जाती है।

रात में सेवन से बचें: आयुर्वेद के अनुसार रात में दही खाना बलगम और कफ बढ़ा सकता है।

मीठी दही नहीं, सादी दही बेहतर: अतिरिक्त चीनी से फायदे कम हो सकते हैं।

विशेषज्ञों की राय क्या है?

वरिष्ठ आहार विशेषज्ञ डॉ. के अनुसार, “दही में प्राकृतिक प्रोबायोटिक्स होते हैं जो आंतों की सेहत को सुधारते हैं और शरीर में सूजन कम करने में मदद करते हैं। ये दोनों ही चीजें कैंसर जैसी बीमारियों से बचाव में अहम भूमिका निभाती हैं।”

सावधानी:

हालांकि दही फायदेमंद है, लेकिन अधिक सेवन या गलत समय पर खाने से नुकसान भी हो सकता है। ठंडी प्रकृति वालों को दही सीमित मात्रा में ही खाना चाहिए।

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