दक्षिण कोरिया की राजनीति में बड़ा उलटफेर हुआ है। देश के पूर्व राष्ट्रपति यून सूक येओल, जिन्हें उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन का कट्टर विरोधी माना जाता रहा है, अब खुद ही सत्ता से बेदखल हो गए हैं। न कोई मिसाइल हमला हुआ, न कोई बम गिरा — लेकिन फिर भी यून की राजनीतिक पारी खत्म हो गई।
दरअसल, दक्षिण कोरिया की शीर्ष अदालत ने उनके खिलाफ लाए गए महाभियोग को सही ठहराते हुए उन्हें पद से हटाने का आदेश दे दिया है। यह फैसला मार्च 2024 में यून द्वारा पूरे देश में मार्शल लॉ लागू करने के बाद आए भारी विरोध के चलते आया है।
⚖️ अदालत का फैसला: लोकतंत्र के खिलाफ कार्रवाई
अदालत ने साफ कहा कि यून का मार्शल लॉ लागू करना संविधान के खिलाफ था और उन्होंने आंतरिक असंतोष को दबाने के लिए सत्ता का दुरुपयोग किया। यही कारण है कि उन्हें राष्ट्रपति पद छोड़ना पड़ा। इस फैसले ने न सिर्फ यून का राजनीतिक करियर बर्बाद कर दिया, बल्कि दक्षिण कोरिया की राजनीति में एक नया अध्याय भी जोड़ दिया।
🤔 अब आगे क्या?
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब दक्षिण कोरिया में नए राष्ट्रपति के चुनाव कराए जाएंगे। तब तक देश की कमान एक कार्यवाहक राष्ट्रपति के हाथों में रहेगी। यून के खिलाफ देशद्रोह और संविधान विरोधी गतिविधियों के तहत केस पहले से ही दर्ज है। अभी उन्हें इस केस में राहत मिली है, लेकिन कयास लगाए जा रहे हैं कि अब उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।
🇺🇸 यून की अमेरिका परस्ती और किम विरोध
यून के कार्यकाल के दौरान दक्षिण कोरिया और अमेरिका के रिश्ते बेहद मजबूत हुए। उन्होंने मिलकर किम जोंग उन के खिलाफ सैन्य और रणनीतिक मोर्चेबंदी की। लेकिन अब यून खुद ही अपने देश में साइडलाइन हो चुके हैं। उनका जाना किम के लिए राहत का संकेत माना जा रहा है।
👨⚖️ वकील से राष्ट्रपति तक का सफर
सियोल में जन्मे यून ने कानून की पढ़ाई की और फिर वकील बने। 2019 में वे दक्षिण कोरिया के महाधिवक्ता नियुक्त किए गए। यहीं से उनके राजनीतिक करियर की शुरुआत हुई।
2022 में वे देश के राष्ट्रपति बने, लेकिन सिर्फ दो साल के भीतर ही, 2024 में उन्होंने विरोध को कुचलने के लिए जो कदम उठाया, वही उनके पतन की वजह बन गया।
अब देश नए राष्ट्रपति की तलाश में है, और यून का राजनीतिक भविष्य अंधेरे में नजर आ रहा है।
यह भी पढ़ें: