कांग्रेस ने संसद में मोदी सरकार को घेरने के लिए एक बड़ी रणनीति तैयार की है। इसके लिए वह छह प्रमुख मुद्दों पर फोकस कर रही है, जिनमें नई शिक्षा नीति, सदन में विपक्ष की आवाज, वक्फ संशोधन बिल, आरक्षण, पूर्वोत्तर राज्यों की स्थिति और हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण का मुद्दा शामिल है।
1. विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप
कांग्रेस का कहना है कि संसद में विपक्ष के नेताओं को बोलने का पर्याप्त मौका नहीं दिया जा रहा है। लोकसभा और राज्यसभा में नेता विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है। इसे लेकर कांग्रेस संसद में सरकार के खिलाफ जोरदार विरोध करेगी।
2. नई शिक्षा नीति पर सवाल
कांग्रेस नई शिक्षा नीति (NEP-2020) पर सरकार को घेरने की तैयारी कर रही है। सोनिया गांधी ने हाल ही में एक लेख में सरकार की नीति पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि यह शिक्षा के “केंद्रीकरण, व्यवसायीकरण और सांप्रदायिकरण” को बढ़ावा देती है। कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार ने NEP लागू करते समय राज्य सरकारों से कोई चर्चा नहीं की और शिक्षा को पूरी तरह से अपने नियंत्रण में लेने की कोशिश कर रही है।
3. आरक्षण पर कांग्रेस का वार
कांग्रेस आर्टिकल 15(5) का मुद्दा भी उठाने जा रही है। पार्टी का कहना है कि 2006 में संविधान संशोधन के जरिए उच्च शिक्षण संस्थानों में आरक्षण लागू किया गया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने भी सही ठहराया। लेकिन, पिछले 11 साल से मोदी सरकार इसे नजरअंदाज कर रही है। कांग्रेस इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगने वाली है।
4. वक्फ संशोधन बिल पर विरोध
वक्फ संशोधन बिल को लेकर भी कांग्रेस सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी कर रही है। पार्टी का कहना है कि यह बिल अल्पसंख्यकों के खिलाफ है और सरकार इसे जबरन लागू करने की कोशिश कर रही है।
5. पूर्वोत्तर राज्यों की स्थिति पर सवाल
कांग्रेस, मणिपुर, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश में बिगड़ती स्थिति को लेकर भी सरकार से जवाब मांगने वाली है। पार्टी का कहना है कि सरकार इन राज्यों को अशांत क्षेत्र घोषित करने और AFSPA लागू करने की योजना बना रही है, जिससे वहां के हालात और खराब हो सकते हैं।
6. ध्रुवीकरण का मुद्दा
कांग्रेस देश में हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण के बढ़ते मामलों पर भी सरकार को घेरने की योजना बना रही है। पार्टी का आरोप है कि बीजेपी सरकार समाज में दरार पैदा करने का काम कर रही है, जिससे देश की एकता को खतरा हो सकता है।
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