पुतिन की शर्तों पर टिका अमेरिका-रूस समझौता

रूस और यूक्रेन के बीच लंबे समय से जारी युद्ध को खत्म करने की कोशिशों के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच एक अहम वीडियो बैठक हुई। इस बैठक के बाद अमेरिका ने ऐलान किया कि ब्लैक सी (काला सागर) में संघर्ष विराम को लेकर दोनों देशों के बीच समझौता हो गया है। इससे पहले, यूक्रेन के ऊर्जा ढांचे पर हमले रोकने को लेकर भी एक समझौता हुआ था।

लेकिन क्या यह समझौता पूरी तरह से सीजफायर है?
इस बैठक में ट्रंप की मंशा पूरे युद्ध को खत्म करने की थी, लेकिन पुतिन ने अपनी शर्तों से उन्हें घेर लिया। रूस ने पूरे युद्ध पर सीजफायर की बजाय इसे सिर्फ ब्लैक सी तक सीमित रखने पर जोर दिया। इसके अलावा, पुतिन ने अपने आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए कई शर्तें भी मनवा लीं।

रूस की अर्थव्यवस्था को मिलेगा फायदा!
व्हाइट हाउस के मुताबिक, अमेरिका ने रूस को वैश्विक कृषि और उर्वरक बाजारों में वापसी में मदद करने का वादा किया है। इसके साथ ही, अमेरिका ने शांति वार्ता को बढ़ावा देने पर भी सहमति जताई है। हालांकि, इस फैसले से यूक्रेन और अन्य पश्चिमी देशों में असंतोष बढ़ सकता है, क्योंकि यह रूस की अर्थव्यवस्था को संजीवनी देने वाला समझौता माना जा रहा है।

सऊदी अरब में हुई अमेरिका-रूस वार्ता
इस सीजफायर समझौते से पहले 23 से 25 मार्च तक सऊदी अरब के रियाद में अमेरिका और रूस के बीच कई दौर की बातचीत हुई। इस दौरान ब्लैक सी में सुरक्षित नेविगेशन, बल प्रयोग पर रोक और व्यापारिक जहाजों के सैन्य उपयोग को रोकने पर सहमति बनी। ट्रंप प्रशासन ने इस समझौते को युद्ध रोकने की दिशा में अहम कदम बताया है।

क्या ट्रंप प्रशासन ने रूस को फायदा पहुंचाया?
इस समझौते के बाद कई विशेषज्ञ सवाल उठा रहे हैं कि क्या ट्रंप प्रशासन ने रूस के लिए फायदेमंद डील कर ली है? अमेरिका ने रूस की शिपिंग इंश्योरेंस लागत घटाने, बड़े बंदरगाहों तक पहुंच आसान बनाने और भुगतान प्रणाली में सुधार करने जैसी कई रियायतें देने का वादा किया है।

गौरतलब है कि यूक्रेन पर हमले के बाद अमेरिका ने रूस पर कई कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे, जिनमें उसकी वैश्विक भुगतान प्रणाली पर रोक भी शामिल थी। लेकिन अब इन्हीं प्रतिबंधों में ढील देने की बात की जा रही है, जिससे रूस को बड़ा आर्थिक लाभ हो सकता है।

पुतिन की शर्तों पर टिका समझौता!
रूस ने इस समझौते में यूक्रेन पर हमले रोकने के बदले कई कड़ी शर्तें रखीं।
✅ रूस की मांग है कि उसे वैश्विक बाजारों में तेल, गैस और उर्वरक निर्यात की पूरी छूट दी जाए।
✅ अगर अमेरिका रूस पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों में ढील नहीं देता, तो यह संघर्ष विराम लंबे समय तक नहीं टिकेगा।
✅ रूस चाहता है कि पश्चिमी देश उसे फिर से व्यापारिक और वित्तीय स्वतंत्रता दें।

क्या यूक्रेन को होगा नुकसान?
अमेरिका और रूस के इस कथित सीजफायर समझौते पर यूक्रेन और पश्चिमी देशों की नाराजगी बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप ने जल्दबाजी में रूस के पक्ष में समझौता कर लिया, जिससे अमेरिका को भारी विरोध का सामना करना पड़ सकता है।

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