हर साल 4 मार्च को वर्ल्ड ओबेसिटी डे मनाया जाता है, ताकि मोटापा और उससे होने वाले स्वास्थ्य संबंधी खतरों के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाई जा सके। यह समस्या सिर्फ वयस्कों तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत में 35% बच्चे भी ओबेसिटी के शिकार हैं।
हेल्थ एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं?
सफदरजंग अस्पताल के पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, बच्चों में मोटापे का सबसे बड़ा कारण उनकी खराब लाइफस्टाइल, घंटों मोबाइल-टीवी देखना और कम शारीरिक गतिविधि करना है। सोशल मीडिया और जंक फूड की लत ने भी इस समस्या को और बढ़ा दिया है।
बचपन की गलतियां जो बढ़ा रही हैं मोटापा
🔸 गलत डाइट: जन्म से ही सही पोषण न मिलने के कारण बच्चे मोटापे का शिकार हो रहे हैं।
🔸 अधिक दूध का सेवन: डॉक्टरों के अनुसार, 1 से डेढ़ साल के बच्चे को सिर्फ 250 ग्राम दूध पीना चाहिए, लेकिन हमारे देश में छोटे बच्चे दिन में 1 लीटर से ज्यादा दूध पीते हैं, जो शरीर के लिए सही नहीं है।
🔸 कम फिजिकल एक्टिविटी: बाहर खेलने की बजाय बच्चे मोबाइल-टीवी से चिपके रहते हैं, जिससे उनका वजन तेजी से बढ़ता है।
मोटापे से बढ़ने वाली बीमारियां
⚠️ टाइप 2 डायबिटीज – बचपन में बढ़ा मोटापा डायबिटीज का कारण बन सकता है।
⚠️ हार्ट डिजीज – ज्यादा वजन होने से दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
⚠️ कोलेस्ट्रॉल बढ़ना – शरीर में असंतुलित फैट जमा होने से कोलेस्ट्रॉल लेवल बढ़ जाता है।
⚠️ हड्डियों की कमजोरी – मोटे बच्चों की हड्डियां ज्यादा वजन उठाने के कारण कमजोर हो जाती हैं।
⚠️ कैंसर का खतरा – कुछ रिसर्च के अनुसार, मोटापा कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का भी कारण बन सकता है।
कैसे बच सकते हैं मोटापे से?
✅ बच्चों की डाइट संतुलित रखें, जंक फूड से बचें।
✅ उन्हें रोजाना फिजिकल एक्टिविटी (खेल-कूद, योग) में शामिल करें।
✅ टीवी, मोबाइल और सोशल मीडिया की लत से बचाएं।
✅ समय-समय पर हेल्थ चेकअप कराएं।
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