सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाला एक गंभीर कैंसर है, जो गर्भाशय ग्रीवा (सर्विक्स) में विकसित होता है। यह मुख्य रूप से ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) संक्रमण के कारण होता है, जो लंबे समय तक शरीर में रहने से कैंसर का रूप ले सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, भारत में हर साल हजारों महिलाएं इस बीमारी से प्रभावित होती हैं। यदि शुरुआती चरण में इसका पता चल जाए तो यह पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है, लेकिन देर होने पर इसका इलाज मुश्किल हो जाता है।
सर्वाइकल कैंसर के प्रमुख कारण
🔹 HPV संक्रमण – यह सर्वाइकल कैंसर का सबसे बड़ा कारण है।
🔹 कमजोर इम्यून सिस्टम – शरीर वायरस से प्रभावी रूप से लड़ नहीं पाता है।
🔹 धूम्रपान – तंबाकू में मौजूद हानिकारक तत्व इम्यून सिस्टम को कमजोर करते हैं।
🔹 बार-बार गर्भधारण – हॉर्मोनल बदलाव और सर्विक्स पर अधिक दबाव पड़ता है।
🔹 ओरल कांट्रासेप्टिव पिल्स – लंबे समय तक सेवन करने से हॉर्मोनल इम्बैलेंस हो सकता है।
सर्वाइकल कैंसर के लक्षण
🔴 असामान्य ब्लीडिंग – पीरियड्स के बीच, इंटरकोर्स के बाद या मेनोपॉज के बाद ब्लीडिंग।
🔴 असामान्य डिस्चार्ज – दुर्गंधयुक्त, गाढ़ा सफेद या लाल रंग का वजाइनल डिस्चार्ज।
🔴 पेट के निचले हिस्से में दर्द – लगातार या समय-समय पर असहजता महसूस होना।
🔴 इंटरकोर्स के दौरान दर्द – यौन संबंध बनाते समय दर्द या ब्लीडिंग होना।
🔴 पेशाब में बदलाव – बार-बार पेशाब आना, जलन या खून आना।
🔴 तेजी से वजन कम होना और कमजोरी – बिना किसी कारण वजन घट रहा हो।
🔴 टांगों में सूजन – लिम्फ नोड्स प्रभावित होने से सूजन आ सकती है।
👉 अगर इनमें से कोई भी लक्षण दिखे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
कैसे करें सर्वाइकल कैंसर से बचाव?
✔️ HPV वैक्सीन लें – 9 से 26 साल की उम्र की लड़कियों और महिलाओं को यह वैक्सीन जरूर लगवानी चाहिए।
✔️ पैप स्मीयर टेस्ट कराएं – 21 साल की उम्र से हर 3 साल में यह टेस्ट करवाने से शुरुआती चरण में बीमारी की पहचान हो सकती है।
✔️ सुरक्षित यौन संबंध बनाएं – कंडोम का उपयोग करने से HPV संक्रमण का खतरा कम होता है।
✔️ धूम्रपान से बचें – तंबाकू छोड़ने से कैंसर का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है।
✔️ हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं – संतुलित आहार और नियमित एक्सरसाइज से इम्यून सिस्टम मजबूत बना रहता है।
निष्कर्ष:
सर्वाइकल कैंसर से बचाव संभव है यदि हम समय रहते लक्षणों को पहचानें और सही कदम उठाएं। HPV वैक्सीन, नियमित पैप स्मीयर टेस्ट और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इस बीमारी के खतरे को कम किया जा सकता है। महिलाओं को चाहिए कि वे अपनी सेहत को प्राथमिकता दें और नियमित जांच कराएं।
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