गठिया (आर्थराइटिस) को आमतौर पर बुजुर्गों की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब यह युवा लोगों को भी प्रभावित कर रहा है। इस बीमारी में जोड़ों में सूजन, दर्द और जकड़न हो जाती है, जिससे चलने-फिरने में दिक्कत होती है।
क्या फिजियोथेरेपी गठिया में कारगर हो सकती है?
बाजार में गठिया के लिए कई दवाएं और तेल उपलब्ध हैं, लेकिन क्या फिजियोथेरेपी इस बीमारी से राहत दिला सकती है? इसका जवाब हां है!
👉 फिजियोथेरेपी गठिया के दर्द को कम करने, जोड़ो की जकड़न दूर करने और मूवमेंट सुधारने में मदद करती है।
👉 हल्के और मध्यम स्तर के गठिया में बिना दवा के भी राहत पाई जा सकती है।
👉 गंभीर मामलों में डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है।
फिजियोथेरेपी के फायदे
✅ मांसपेशियों को मजबूत बनाती है – इससे जोड़ों पर दबाव कम होता है और दर्द में राहत मिलती है।
✅ संतुलन और लचीलापन बढ़ाती है – चलने, उठने-बैठने और सीढ़ियां चढ़ने में आसानी होती है।
✅ जोड़ों की जकड़न कम करती है – स्ट्रेचिंग और मूवमेंट एक्सरसाइज से जकड़न दूर होती है।
✅ दर्द से राहत दिलाती है – गर्म और ठंडी सिकाई से भी फायदा मिलता है।
बिना दवा के आर्थराइटिस को करें कम
अगर गठिया हल्का है, तो इसे फिजियोथेरेपी और एक्सरसाइज से नियंत्रित किया जा सकता है।
📌 योग और स्ट्रेचिंग – जोड़ो की फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ाने में मददगार।
📌 वॉटर थेरेपी – पानी में एक्सरसाइज करने से जोड़ो पर कम दबाव पड़ता है।
📌 एंटी-इंफ्लेमेटरी डाइट – हल्दी, अदरक, ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर चीजें फायदेमंद।
📌 गर्म और ठंडी सिकाई – दर्द और सूजन को कम करने में कारगर।
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