बेंगलुरु के एक टेक प्रोफेशनल को साइबर ठगों के नए तरीके से बड़ा नुकसान झेलना पड़ा। ठगों ने उनकी बैंकिंग जानकारी चुराकर 2.8 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी कर ली। इस धोखाधड़ी में एक फर्जी सिटीबैंक प्रतिनिधि, एक नकली सिम कार्ड और पहले से तैयार किए गए मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया गया।
व्हाट्सएप कॉल से हुई शुरुआत
27 नवंबर 2024 को पीड़ित को व्हाट्सएप पर कॉल आया, जिसमें एक व्यक्ति ने सिटीबैंक के प्रतिनिधि होने का दावा किया। उसने कहा कि पीड़ित का क्रेडिट कार्ड मंजूर नहीं हुआ है और इसके लिए उन्हें नया सिम कार्ड लेना होगा।
कुछ दिनों बाद, पीड़ित को सिटी यूनियन बैंक के नाम से एक पैकेट मिला। इस पैकेट में एमआई 13 सी कंपनी का एक मोबाइल फोन और एक नया सिम कार्ड था।
सिम कार्ड लगाते ही शुरू हुई धोखाधड़ी
पीड़ित ने बिना कुछ शक किए, उस सिम कार्ड को फोन में लगा दिया। लेकिन उन्हें नहीं पता था कि फोन में पहले से ही खतरनाक ऐप्स इंस्टॉल थे। ये ऐप्स उनके फोन पर आने वाले ओटीपी और बैंकिंग जानकारी को ठगों तक पहुंचा रहे थे।
1 दिसंबर 2024 को सिम कार्ड एक्टिव होने के बाद, ठगों ने पीड़ित के एचडीएफसी बैंक खातों से 2.8 करोड़ रुपये निकाल लिए। इस रकम में उनके फिक्स्ड डिपॉजिट का पैसा भी शामिल था।
ठगी का तरीका: पहले से तैयार मोबाइल फोन और सिम कार्ड
ठगों ने एक पहले से प्रोग्राम किया हुआ मोबाइल फोन भेजा।
इस फोन में ऐसे ऐप्स थे जो ओटीपी और एसएमएस को चोरी कर ठगों के पास भेजते थे।
सिम कार्ड एक्टिवेट होते ही, ठगों ने बैंक खातों से रकम निकालनी शुरू कर दी।
पुलिस जांच में जुटी
पीड़ित ने व्हाइटफील्ड पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने इस घटना को लेकर आईटी अधिनियम के तहत जांच शुरू कर दी है।
सावधान रहें, बचाव करें
अजनबियों की व्हाट्सएप कॉल पर विश्वास न करें।
कोई भी नया सिम कार्ड या फोन इस्तेमाल करने से पहले उसकी प्रामाणिकता जांचें।
ओटीपी और बैंकिंग जानकारी को हमेशा गुप्त रखें।
बैंकिंग से जुड़े किसी भी कॉल या मैसेज को तुरंत वेरीफाई करें।
निष्कर्ष
यह घटना दिखाती है कि साइबर अपराधी अब हाई-टेक तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। सावधानी और जागरूकता से ही ऐसे अपराधों से बचा जा सकता है। हमेशा सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत रिपोर्ट करें।
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