उच्चतम न्यायालय ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ कविता लंकेश की याचिका खारिज कर दी है, जिसमें उनकी बड़ी बहन एवं पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या के मामले में एक आरोपी को जमानत दी गई थी।
न्यायमूर्ति बेला एम. त्रिवेदी और न्यायमूर्ति एस. सी. शर्मा की पीठ ने कहा कि आरोपी मोहन नायक ने निचली अदालत के साथ सहयोग किया और कोई स्थगन नहीं मांगा।
पीठ ने कहा, ‘‘इन परिस्थितियों में, हम उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेशों में हस्तक्षेप करने के इच्छुक नहीं हैं। हालांकि, यह निर्देश दिया जाता है कि निचली अदालत तेजी से सुनवाई करेगी और सभी पक्ष मुकदमे को समाप्त करने में निचली अदालत के साथ सहयोग करेंगे।’’
उसने कहा, ‘‘कहने की जरूरत नहीं है कि यदि प्रतिवादी (आरोपी) सहयोग नहीं करता है या अनावश्यक स्थगन मांगता है या किसी शर्त का उल्लंघन करता है, तो कर्नाटक सरकार या शिकायतकर्ता जमानत रद्द करने की अर्जी दाखिल करने के लिए स्वतंत्र होगा और यदि ऐसा कोई आवेदन दायर किया जाता है, तो उसका निर्णय उसके गुण-दोष के आधार पर तथा कानून के अनुसार किया जाएगा।’’
कविता ने सात दिसंबर 2023 के उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख किया था।
कर्नाटक की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने न्यायालय को बताया कि अभी तक अभियोजन पक्ष ने 137 गवाहों से जिरह की है, 137 गवाहों ने नाम हटा दिए गए हैं तथा अभियोजन पक्ष 150 और गवाहों के नाम हटा सकता है एवं करीब 100 गवाहों से अब भी जिरह की जानी है।
लंकेश की पांच सितंबर 2017 को बेंगलुरु के राजराजेश्वरी नगर में उनके आवास के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी।
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