NEET-UG परीक्षा में हुई अनियमितताओं ने शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गहरे सवाल खड़े किए। छात्रों का गुस्सा और निराशा इस बात का प्रमाण है कि शिक्षा केवल परीक्षा पास करने का माध्यम नहीं, बल्कि भविष्य गढ़ने की नींव है।
जंतर-मंतर पर 36 दिनों से जारी छात्रों के आंदोलन के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है।
जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा, “कॉकरोच हैं, एक बार घुसता है तो निकलता नहीं है।” उनका यह बयान केवल व्यंग्य नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर चोट है जो वर्षों से छात्रों की समस्याओं को नजरअंदाज करती रही है। दीपके ने आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक करोड़ रुपये मुआवजे की मांग रखकर आंदोलन को और मजबूती दी।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा, “सब कहते हैं कि सरकार कभी झुकती नहीं है, पर इस सरकार को झुकना पड़ा।” उनका यह बयान स्पष्ट करता है कि जब जनता एकजुट होती है, तो सत्ता को झुकना ही पड़ता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि भविष्य में कभी पेपर लीक न हो, इसके लिए ठोस कदम उठाना सरकार की जिम्मेदारी है।
अब सवाल यह है कि क्या सरकार शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाएगी, या यह इस्तीफा केवल एक प्रतीकात्मक घटना बनकर रह जाएगा।
Navyug Sandesh Hindi Newspaper, Latest News, Findings & Fact Check