डिजिटल इंडिया की रफ्तार के साथ-साथ ऑनलाइन ठगी के मामले भी तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। अब साइबर अपराधी (Scammers) पहले से कहीं ज्यादा चालाक और तकनीकी रूप से सक्षम हो गए हैं। ताज़ा जानकारी के मुताबिक, स्कैमर्स ने एक नया और बेहद खतरनाक तरीका अपनाया है, जिसके जरिए वे आम लोगों से लाखों रुपये की ठगी कर रहे हैं — और हैरानी की बात यह है कि लोग बिना कुछ जाने-समझे अपने ही हाथों से पैसा ट्रांसफर कर रहे हैं।
क्या है ठगी का नया तरीका?
साइबर अपराधी अब फर्जी कॉल सेंटर, नकली बैंक अधिकारी, डिजिटल केवाईसी, और फर्जी UPI लिंक के जरिए लोगों को ठग रहे हैं।
सबसे आम तरीका यह है कि स्कैमर खुद को किसी बैंक, ई-कॉमर्स कंपनी या सरकारी एजेंसी का प्रतिनिधि बताकर व्यक्ति को कॉल करता है। फिर किसी न किसी बहाने — जैसे केवाईसी अपडेट, रिवॉर्ड प्वाइंट्स, सस्पिशियस ट्रांजैक्शन या अकाउंट वेरिफिकेशन — के नाम पर उसे डराया या लालच दिया जाता है।
इसके बाद पीड़ित को एक लिंक या ऐप डाउनलोड करने को कहा जाता है, जो असल में एक रीमोट एक्सेस ऐप होता है। जैसे ही यूजर वह ऐप इंस्टॉल करता है, स्कैमर को उसके मोबाइल की पूरी जानकारी मिल जाती है। इसके बाद वे बैंक ऐप्स या वॉलेट से रकम ट्रांसफर कर लेते हैं।
सोशल मीडिया पर भी बिछाया जा रहा जाल
फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म्स पर स्कैमर्स फर्जी जॉब ऑफर, इनाम जितने के मैसेज, और कम ब्याज दर पर लोन जैसी स्कीम्स चलाकर लोगों को शिकार बना रहे हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति इस झांसे में आता है, उससे आधार कार्ड, बैंक डिटेल्स, ओटीपी और अन्य निजी जानकारियां मांग ली जाती हैं।
पीड़ितों की संख्या में तेजी से इजाफा
साइबर सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, केवल बीते तीन महीनों में देशभर में हजारों लोग इस तरह की ऑनलाइन धोखाधड़ी के शिकार हुए हैं। खासकर बुजुर्ग, ग्रामीण इलाकों के लोग और तकनीकी जानकारी से दूर रहने वाले युवा सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
कैसे बचें इस नई तरह की ठगी से?
विशेषज्ञों और साइबर सुरक्षा विभाग की सलाह पर गौर करें:
अनजान नंबरों से आए कॉल पर बैंकिंग या पर्सनल जानकारी बिलकुल न दें।
कोई भी ऐप, लिंक या सॉफ्टवेयर केवल ऑफिशियल वेबसाइट से ही डाउनलोड करें।
अगर कोई व्यक्ति केवाईसी या बैंक अकाउंट बंद होने की धमकी दे, तो सीधे संबंधित बैंक से संपर्क करें।
सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे ऑफर्स या स्कीम्स की सत्यता जांचे बिना कोई जानकारी साझा न करें।
साइबर क्राइम की शिकायत www.cybercrime.gov.in
पर दर्ज कराएं।
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