नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) लागू होने के बाद भारत की शिक्षा व्यवस्था में कई क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिल रहे हैं। इसका उद्देश्य शिक्षा को अधिक समावेशी, कौशल-आधारित और लचीला बनाना है, ताकि छात्रों को 21वीं सदी की जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जा सके।
1. 5+3+3+4 ढांचा: पारंपरिक व्यवस्था का अंत
अब तक भारत में स्कूली शिक्षा को 10+2 फॉर्मेट में विभाजित किया गया था, लेकिन NEP के तहत 5+3+3+4 ढांचे को लागू किया गया है।
5 वर्ष: फाउंडेशन स्टेज (प्राथमिक शिक्षा और आंगनवाड़ी)
3 वर्ष: प्रिपरेटरी स्टेज
3 वर्ष: मिडिल स्टेज
4 वर्ष: सेकेंडरी स्टेज
इसका मकसद शिक्षा की बुनियाद को मजबूत बनाना है।
2. मल्टीपल एंट्री और एग्जिट सिस्टम
अब छात्र किसी भी डिग्री को अधूरा छोड़ने के बावजूद सर्टिफिकेट, डिप्लोमा या डिग्री प्राप्त कर सकेंगे। इससे शिक्षा बीच में छोड़ने वालों के लिए विकल्प खुले रहेंगे और वे दोबारा पढ़ाई शुरू कर सकेंगे।
3. मातृभाषा में शिक्षा
कक्षा 5 तक मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा में पढ़ाई को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे बच्चों की सीखने की क्षमता और समझ में बढ़ोतरी होगी।
4. डिजिटल लर्निंग और तकनीकी बदलाव
NEP के अंतर्गत DIKSHA पोर्टल, ई-विद्या, SWAYAM और नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी जैसे प्लेटफॉर्म्स को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे छात्रों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण डिजिटल शिक्षा मिलेगी।
5. स्किल डेवलपमेंट और व्यावसायिक शिक्षा
अब छात्रों को कक्षा 6 से ही कोडिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और व्यावसायिक शिक्षा सिखाई जाएगी। इससे युवा वर्ग रोजगार के लिए अधिक तैयार होगा।
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