बांग्लादेश की सत्ता एक बार फिर संकट में है। शेख हसीना के तख्तापलट को 9 महीने भी पूरे नहीं हुए कि अब अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस की कुर्सी हिलने लगी है। उनके करीबी नाहिद इस्लाम ने संकेत दिए हैं कि यूनुस कभी भी इस्तीफा दे सकते हैं।
यह बयान ऐसे समय आया है जब सेना प्रमुख जनरल वकार-उज-जमान ने अंतरिम सरकार को खुली चेतावनी दे दी है। उन्होंने सरकार को “अवैध” करार देते हुए कहा कि देश में दिसंबर 2025 तक आम चुनाव कराने होंगे। जनरल जमान का स्पष्ट संदेश था – “नीतिगत फैसले केवल निर्वाचित सरकार ही ले सकती है।”
बांग्लादेश में सेना का सत्ता पर मजबूत नियंत्रण
बांग्लादेश में सेना प्रमुख का ओहदा हमेशा से बेहद ताकतवर रहा है। वर्तमान सेना में लगभग 1.6 लाख सैनिक हैं, जो अत्याधुनिक हथियारों से लैस हैं। राजनीतिक अस्थिरता के बीच सेना का प्रभाव अक्सर निर्वाचित सरकारों पर भारी पड़ता रहा है।
जनरल वकार-उज-जमान को शेख हसीना का करीबी माना जाता है। हसीना ने ही उन्हें जून 2024 में सेना प्रमुख बनाया था।
हसीना के तख्तापलट में सेना की भूमिका और जमान की चुप्पी
जब दिसंबर 2024 में शेख हसीना को सत्ता से बाहर किया गया, तो सेना प्रमुख जमान ने अहम भूमिका निभाई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने हसीना के इस्तीफे की सूचना को तीन घंटे तक गुप्त रखा।
ऐसा कहा जाता है कि अगर यह खबर तत्काल सार्वजनिक हो जाती, तो हसीना की जान को खतरा हो सकता था। हसीना जब भारत में शरण ले चुकी थीं, तभी जाकर जमान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस्तीफे की घोषणा की।
सेना प्रमुख पर कार्रवाई करने में नाकाम रहे यूनुस
रिपोर्ट्स बताती हैं कि जब हसीना सत्ता से हटीं, तब जमान ने उन्हें कहा था – “अभी देश छोड़ दीजिए, समय आने पर लौट आइएगा।”
इतना सब कुछ सामने आने के बावजूद मोहम्मद यूनुस सेना प्रमुख पर कोई कार्रवाई नहीं कर पाए। दूसरी ओर, यूनुस सरकार ने पिछले 9 महीनों में हसीना समर्थक अधिकारियों पर शिकंजा कसा है – कई को जेल भेजा गया है और कुछ पर मौत की सजा तक की तलवार लटक रही है।
फिर भी, जनरल जमान अपनी कुर्सी पर मजबूती से जमे हुए हैं।
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